विशेषज्ञों की मानें तो गोवा का रियल एस्टेट बाजार अब केवल एक सेकेंड-होम डेस्टिनेशन नहीं रहा, बल्कि यह एक स्थायी निवेश और लाइफस्टाइल बाजार के रूप में उभर रहा है. देशभर में बढ़ती कीमतों और प्रीमियम सेगमेंट की ओर झुकाव के बीच गोवा में मांग का आधार अलग-अलग रहा है. इसमें एनआरआई निवेशक, हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स, रिटायरमेंट होम खरीदार और रिमोट वर्किंग प्रोफेशनल्स शामिल हैं.
प्रॉपइक्विटी के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में टियर-2 शहरों में 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1 करोड़ रुपये से ऊपर के घरों की बिक्री में 9 परसेंट की वृद्धि हुई. गोवा में भी प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट की मांग अपेक्षाकृत ज्यादा रही, जिसने कुल बिक्री को स्थिर बनाए रखने में जरूरी भूमिका निभाई.
वहीं अगर नई यूनिट्स की सप्लाई की बात करें तो गोवा संतुलित बाजार रहा है. 2025 में यहां नई लॉन्चिंग 2,799 यूनिट्स से घटकर 2,749 यूनिट्स रही, हालांकि यह बेहद मामूली 2 परसेंट की गिरावट है. जबकि कई अन्य शहरों में नई आपूर्ति में 20 फीसदी से 50 फीसदी तक की कमी देखी गई. इससे संकेत मिलता है कि डेवलपर्स गोवा में बढ़ती मांग को देखते हुए निरंतर निवेश को बनाए हुए हैं.
गोवा में क्या खरीद रहे हैं लोग?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार गोवा में बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन-आधारित अर्थव्यवस्था, वर्क-फ्रॉम-एनीवेयर ट्रेंड और लाइफस्टाइल-ड्रिवन खरीदारी ने गोवा को अन्य टियर-2 शहरों से अलग पहचान दी है. खासकर उत्तर गोवा और उभरते माइक्रो-मार्केट्स में विला, ब्रांडेड रेसिडेंस और गेटेड कम्युनिटी प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ा है.
इस बारे में जीएचडी ग्रुप के सीएमडी भारत ठाकरान कहते हैं कि गोवा आज सिर्फ एक वेकेशन होम मार्केट नहीं रहा, बल्कि यह तेजी से एक मजबूत लाइफस्टाइल और इन्वेस्टमेंट हब बनता जा रहा है. 2025 में जब अधिकांश टियर-2 शहरों में आवासीय बिक्री में गिरावट दर्ज की गई, तब भी गोवा में मांग का स्तर अपेक्षाकृत स्थिर रहा जो इस बाजार की मजबूती को दिखाता है. बेहतर कनेक्टिविटी, ब्रांडेड और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की बढ़ती मौजूदगी और सेकेंड-होम के साथ एंड-यूजर डिमांड में इजाफा आने वाले समय में गोवा को हाई क्वालिटी वाले रेसिडेंशियल निवेश का प्रमुख केंद्र बनाए रखेगा.
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