बात अगर हम रिहायशी प्रॉपर्टी की करें तो इसकी सबसे बड़ी खूबी है इसकी स्थिरता. पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शहरों में फ्लैट्स और विला की कीमतों में एक समान और टिकाऊ वृद्धि देखी गई है. फार्च्यून प्रिमेरो के डायरेक्टर राहिल रेड्डी का कहना है कि भारत के शीर्ष शहरों में रिहायशी संपत्तियों की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है, जो महंगाई दर से अधिक रहा है. कुछ चुनिंदा बाजारों में तो पिछले एक दशक में कीमतें 100% से भी ज्यादा बढ़ी हैं. यह आंकड़ा दर्शाता है कि रिहायशी घर न केवल रहने के काम आते हैं, बल्कि निवेश के नजरिए से भी एक बेहतरीन विकल्प है.
लक्जरी घरों की बढ़ती चमक
cnbctv18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ साधारण घर ही नहीं, बल्कि लक्जरी सेगमेंट ने भी निवेशकों को काफी आकर्षित किया है. खासकर वे इलाके जो पर्यटन या लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते हैं. द चैप्टर के वाइस प्रसिडेंट दर्शिनी थानावाला का का कहना है कि “नॉर्थ गोवा जैसे उच्च मांग वाले माइक्रो मार्केट में अच्छी डिजाइन वाली ब्रांडेड लक्जरी रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स अक्सर बाजार के औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हैं. आर्किटेक्चरल विशिष्टता, लाइफस्टाइल अपील और सीमित सप्लाई जैसे कारण लंबे समय तक इनकी कीमतों को ऊपर बनाए रखते हैं. उनके अनुसार, एक अच्छी डिजाइन वाला घर बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद अपनी वैल्यू बनाए रखता है.
क्या जमीन खरीदना सही है
दूसरी ओर, जमीन में निवेश करना उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो धैर्य रखते हैं और सही समय पर सही जगह को पहचान लेते हैं. जमीन की कीमत मुख्य रूप से आसपास होने वाले विकास और सरकारी योजनाओं पर टिकी होती है. द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढा (The House of Abhinandan Lodha) के सीईओ समुज्जवल घोष एक दिलचस्प नजरिया साझा करते हैं. उनका कहना है कि अयोध्या, वृंदावन और अमृतसर जैसे सांस्कृतिक महत्व के शहरों में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ और महाकाल कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के कारण जमीन की कीमतों में भारी तेजी देखी गई है. सही स्थान पर स्थित जमीन समय के साथ खूब रिटर्न देती है. उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में वृंदावन और अयोध्या जैसे बाजारों में क्रमशः 29% और 40% CAGR दर्ज की गई है, जो जमीन की ताकत को दिखाता है.
प्रॉपर्टी को कैश में बदलना कितना आसान?
निवेश का एक बड़ा पहलू यह है कि जरूरत पड़ने पर उसे कितनी जल्दी बेचा जा सकता है. रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को बेचना आसान है. रेड्डी के मुताबिक, “बिक्री की गति के लिहाज से घर आमतौर पर ज्यादा जल्दी बिकते हैं. चूंकि इनके लिए होम लोन आसानी से मिल जाता है, इसलिए रिसेल (Resale) काफी सरल हो जाता है. वहीं, जमीन के सौदों में अक्सर नकद की जरूरत ज्यादा होती है और कानूनी कागजातों की जांच में समय लग सकता है.
हालांकि, घोष का मानना है कि अब ब्रांडेड और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विकसित जमीन, जिनके टाइटल क्लियर हैं, उन्हें भी बेचना अब आसान हो गया है. थानावाला का भी यही मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजाइन की गुणवत्ता चाहे जमीन हो या घर, दोनों की बिक्री की गति को तय करती है.
प्रॉपर्टी पर टैक्स
टैक्स के नजरिए से देखें तो जमीन और घर दोनों ही लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में आते हैं. लेकिन नियामक स्तर पर सुरक्षा के मामले में अब चीजें बदल गई हैं. घोष कहते हैं कि स्पष्ट टाइटल वाली जमीन लेनदेन के जोखिम को कम करती है. साथ ही, RERA जैसे कानूनों ने वर्टिकल डेवलपमेंट यानी फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स को औपचारिक रूप दिया है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. रेड्डी के अनुसार, जमीन खरीदते समय ‘जोनिंग’ सबसे अहम है, जबकि रिहायशी घरों में फाइनेंसिंग और टैक्स प्लानिंग ज्यादा आसान होती है.
जोखिम और रिटर्न
रिहायशी संपत्ति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे तुरंत किराये पर चढ़ाया जा सकता है, जिससे हर महीने एक निश्चित आय (Rental Income) होती है. हालांकि, इसमें घर का रखरखाव और समय के साथ होने वाली टूट-फूट की लागत भी शामिल होती है. वहीं जमीन में रखरखाव की लागत लगभग शून्य होती है. घोष के अनुसार, जोखिम जमीन में नहीं होता, बल्कि अप्रमाणित या अव्यवस्थित परियोजनाओं में होता है. सही स्थान पर व्यवस्थित जमीन हमेशा पैसे बनाकर ही देती है.
कहां लगाएं पैसा?
विशेषज्ञों की राय है कि एक आदर्श पोर्टफोलियो वह है जिसमें स्थिरता और विकास दोनों का संतुलन हो. रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी से स्थिर रिटर्न के साथ ही किराए के रूप में आय भी होती है, जो आपके मासिक खर्चों या ईएमआई (EMI) को सहारा दे सकती है. वहीं, सोच-समझकर खरीदी गई जमीन की कीमत किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट या सरकारी नीति के कारण कई गुना बढ़ सकती है.
निवेशकों को अपनी समय-सीमा और रिस्क लेने की क्षमता को देखना चाहिए. अगर आप सुरक्षित और नियमित आय चाहते हैं, तो घर एक बेहतर विकल्प है. लेकिन यदि आप भविष्य के लिए एक बड़ा फंड बनाना चाहते हैं और इंतजार कर सकते हैं, तो उभरते हुए क्षेत्रों में जमीन का टुकड़ा आपके लिए ‘सोने का अंडा’ देने वाली मुर्गी साबित हो सकता है.
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