साल 2025 को लेकर रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी की हालिया रिपोर्ट कहती है कि शीर्ष 15 टियर-2 शहरों में आवासीय बिक्री में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, साथ ही नई लॉन्चिंग भी 6 फीसदी घटी है. रिपोर्ट में देखा गया है कि 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में सालाना 15 फीसदी की गिरावट हुई है जबकि 1 करोड़ से ऊपर के घरों में 9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
साल 2025 में शीर्ष 15 टियर-2 शहरों में आवासीय बिक्री का कुल मूल्य 1.48 लाख करोड़ रुपये पर स्थिर रहा है जबकि बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 10 फीसदी की गिरावट 1,56,181 यूनिट तक पहुंच गई, जो आवास की बढ़ती कीमतों और प्रीमियम संपत्तियों की बढ़ती मांग को दर्शाती है.
रिपोर्ट के अनुसार मोहाली और लखनऊ में बिक्री मात्रा में क्रमशः 34 फीसदी और 6 फीसदी की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई जबकि अहमदाबाद, सूरत, वड़ोदरा, कोची, गांधीनगर, नासिक, जयपुर, भुवनेश्वर, भोपाल, गोवा आदि अन्य 13 शहरों में 38 फीसदी तक की गिरावट देखी गई, जिसमें विशाखापत्तनम में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई.
ज्यादा महंगे यानि एक करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की ओर बढ़ते रुझान को इस बात से समझा जा सकता है कि साल 2025 में 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री मात्रा सालाना आधार पर 15 फीसदी गिरी और इनकी हिस्सेदारी 2024 के 77 फीसदी से घटकर 72 फीसदी ही रह गई. इसी प्रकार 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की बिक्री में 9 परसेंट की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इनकी हिस्सेदारी 2024 के 23 परसेंट से बढ़कर 28 परसेंट हो गई.
क्यों पड़ रहा सस्ते घरों का टोटा, करोड़ों के घरों की बिक्री क्यों ज्यादा
प्रॉपइक्विटी के संस्थापक और सीईओ समीर जसूजा कहते हैं कि पिछले दो वर्षों में आवास बिक्री में आई मंदी का मुख्य कारण 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की घटती सप्लाई है. यह एक ऐसा सेगमेंट है जिसने पारंपरिक रूप से टियर-2 शहरों में मांग को गति दी है. जमीन की बढ़ती कीमतों और निर्माण लागत में वृद्धि के साथ-साथ खरीदारों की बदलती आकांक्षाओं के कारण नई लॉन्चिंग अब ऊंचे प्राइस ब्रैकेट (महंगे वर्गों) की ओर बढ़ रही है. इसके परिणामस्वरूप, टियर-2 बाजार अब तेजी से टियर-1 शहरों की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जहां बिक्री की मात्रा कम हो रही है लेकिन कीमतें लगातार बढ़ रही हैं.
जसूजा ने आगे कहा कि टियर-2 शहरों पर सरकार का बढ़ता फोकस, शहरी विकास में सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक कॉरिडोर और मैन्युफैक्चरिंग हब के निर्माण आदि के चलते कीमतों में निरंतर वृद्धि हो रही है. यही वजह है कि कई टियर-2 बाजारों में औसत घरों की कीमत भी 1 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है, जिससे बिक्री की गति (एब्जॉर्प्शन) धीमी हुई है. आगे चलकर यह रुझान चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि अफोर्डेबिलिटी का दबाव केवल प्रीमियम सेगमेंट ही नहीं, बल्कि इन शहरों के किफायती और मध्यम आय वाले आवासों को भी प्रभावित करने लगा है.
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