Middle East Tensions: ईरान से जुड़े युद्ध के बीच दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और इसके वैकल्पिक रास्तों की तलाश की जा रही है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के जल्द खत्म होने के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा को संबोधित करते हुए मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत की स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया के तनाव को गंभीर बताते हुए कहा कि इस संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है, जिससे लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है और इसका असर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में यह संघर्ष चल रहा है, वह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है. ऐसे में संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि है और केंद्र सरकार पूरी सतर्कता के साथ सभी आवश्यक कदम उठा रही है.
उन्होंने भारत में कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की स्थिति पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि सरकार आपूर्ति बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि इस युद्ध को तीन हफ्ते से अधिक हो चुके हैं और पूरी दुनिया सभी पक्षों से शांति की अपील कर रही है.
स्ट्रैट ऑफ हॉर्मूज बंद लेकिन उठे कदम
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए माल ढुलाई प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है. हालांकि, सरकार ने ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे पेट्रोल और गैस की आपूर्ति पर असर को काफी हद तक कम किया जा सके. उन्होंने पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे हर साल करीब साढ़े चार करोड़ बैरल तेल की बचत होती है.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. ऐसे में मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए सरकार घरेलू गैस को प्राथमिकता दे रही है और एलपीजी के उत्पादन को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है, ताकि आपूर्ति सुचारू बनी रहे.
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