केंद्र सरकार ने बजट 2026 में प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है. इसका मकसद PF टैक्स नियमों को सरल, साफ और एकसमान बनाना है. नए नियमों से सैलरीड कर्मचारियों को टैक्स प्लानिंग में राहत मिलने की उम्मीद है. साथ ही कंपनियों और PF ट्रस्ट्स के लिए कंप्लायंस भी पहले से आसान हो जाएगा.
बजट 2026 का असर: PF टैक्स नियम आसान, कर्मचारियों और कंपनियों की टेंशन कम. (Image:AI)
टैक्स नियमों में एकरूपता की कोशिश
अब तक मान्यता प्राप्त PF ट्रस्ट्स पर इनकम टैक्स एक्ट के नियम लागू होते थे, जबकि EPF से जुड़े योगदान और संचालन EPF एक्ट के तहत आते थे. इन दोनों कानूनों में अंतर होने के कारण कई बार नियमों की अलग-अलग व्याख्या होती थी, जिससे विवाद और कानूनी अड़चनें पैदा होती थीं. सरकार का मानना है कि इन नियमों को एक समान करने से कंप्लायंस आसान होगा और अनावश्यक मुकदमों में कमी आएगी.
7.5 लाख रुपये की टैक्स-फ्री सीमा क्या है
प्रस्तावित बदलाव का सबसे अहम बिंदु 7.5 लाख रुपये की टैक्स-फ्री सीमा है. इसके तहत किसी कर्मचारी के लिए नियोक्ता द्वारा PF, सुपरएन्यूएशन फंड और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में किए गए कुल योगदान पर सालाना 7.5 लाख रुपये तक टैक्स नहीं लगेगा. अगर यह योगदान इस सीमा से अधिक होता है, तो अतिरिक्त रकम को कर्मचारी की आय माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा. सरकार का कहना है कि इससे प्रतिशत आधारित जटिल सीमाओं की जगह एक साफ और समझने योग्य सीमा तय हो जाएगी.
कर्मचारियों पर क्या होगा असर
ज्यादातर सैलरीड कर्मचारियों के लिए यह बदलाव राहत भरा माना जा रहा है. निर्धारित सीमा के भीतर मिलने वाला नियोक्ता योगदान पहले की तरह टैक्स-फ्री रहेगा. साथ ही टैक्स और EPF नियमों में समानता आने से भविष्य में किसी तरह के विवाद की आशंका भी कम होगी. हालांकि, ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों पर इसका असर पड़ सकता है, अगर उनका नियोक्ता योगदान 7.5 लाख रुपये से ज्यादा होता है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि तय सीमा होने से अब वे अपनी सैलरी और रिटायरमेंट प्लानिंग बेहतर तरीके से कर सकेंगे.
कंपनियों और PF ट्रस्ट्स को बड़ी राहत
कंपनियों और PF ट्रस्ट्स के लिए यह प्रस्ताव बड़ी राहत लेकर आया है. अब उन्हें अलग-अलग कानूनों के नियमों को मिलाने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी. इससे न सिर्फ प्रशासनिक बोझ कम होगा, बल्कि कंप्लायंस कॉस्ट और कानूनी जोखिम भी घटेंगे. इसके अलावा, इनकम टैक्स एक्ट में मौजूद पुराने निवेश प्रतिबंधों को EPF निवेश नियमों के अनुरूप लाने की तैयारी है, जिससे PF फंड मैनेजमेंट में ज्यादा लचीलापन मिल सकेगा.
रिटायरमेंट सिस्टम को मजबूत करने की दिशा
कुल मिलाकर, PF नियमों में प्रस्तावित बदलाव को सरकार की एक बड़ी सुधार पहल के तौर पर देखा जा रहा है. साफ टैक्स सीमा, एक जैसे नियम और बेहतर पारदर्शिता से कर्मचारियों का भरोसा मजबूत होगा. वहीं कंपनियों को सरल कंप्लायंस का फायदा मिलेगा. माना जा रहा है कि ये कदम भारत के रिटायरमेंट सेविंग्स सिस्टम को ज्यादा भरोसेमंद और प्रभावी बनाने में मदद करेंगे.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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