क्यों बढ़ा सोने की ओर झुकाव?
ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता, बाजार की हायर वैल्यूएशन और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच सोना पारंपरिक रूप से सेफ हेवन माना जाता है. जब शेयर बाजार में रिस्क बढ़ता है, तो निवेशक आमतौर पर सोने की तरफ जाते हैं. जनवरी के आंकड़े भी यही कहानी कहते हैं.
ETFs क्यों बन रहे हैं पसंदीदा विकल्प?
गोल्ड और सिल्वर ETFs डिमैट अकाउंट के जरिए खरीदे-बेचे जा सकते हैं और ये घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमत को ट्रैक करते हैं. इनमें प्योरिटी या स्टोरेज की चिंता नहीं रहती. हालांकि, इनमें एक्सपेंस रेशियो और ट्रैकिंग एरर जैसे फैक्टर रिटर्न पर थोड़ा असर डाल सकते हैं. फिर भी, जिन निवेशकों को बाजार की समझ है और जो पोर्टफोलियो में बैलेंस चाहते हैं, उनके लिए ETFs सुविधाजनक विकल्प माने जा रहे हैं.
डिजिटल गोल्ड का आकर्षण, लेकिन रिस्क भी
डिजिटल गोल्ड और सिल्वर ने भी पिछले कुछ सालों में लोकप्रियता हासिल की है. इसमें छोटी रकम से भी निवेश संभव है और खरीद-बिक्री लगभग तुरंत हो जाती है. सोना-चांदी इंश्योर्ड वॉल्ट (Insured Vaults) में सुरक्षित रखा जाता है. हालांकि, यह ऑप्शन पूरी तरह रेगुलेटेड नहीं है, इसलिए प्लेटफॉर्म से जुड़े रिस्क को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. छोटे और मध्यम अवधि के लक्ष्य रखने वाले निवेशकों के लिए यह सुविधाजनक हो सकता है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: टैक्स में सबसे ज्यादा फायदा
अगर लंबी अवधि की बात करें, तो आरबीआई की ओर से जारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) सबसे टैक्स-एफिशिएंट विकल्प माने जाते हैं. इनमें सोने की कीमत बढ़ने का फायदा तो मिलता ही है, साथ में तय ब्याज भी मिलता है. सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी तक रखने पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती है. हालांकि, अभी नए SGB जारी नहीं हो रहे हैं और सेकेंडरी मार्केट में इनकी लिक्विडिटी सीमित रहती है.
फिजिकल गोल्ड: परंपरा का हिस्सा, रिटर्न कमजोर
भारत में फिजिकल गोल्ड यानी गहने, सिक्के या बिस्किट खरीदना परंपरा का हिस्सा है. लेकिन निवेश के नजरिए से इसमें मेकिंग चार्ज, GST, स्टोरेज खर्च और बेचते समय कटौती जैसी समस्याएं होती हैं. इसलिए एक्सपर्ट मानते हैं कि यह ऑप्शन ज्यादा भावनात्मक और कंजम्पशन (शादी आदि) से जुड़ा है, न कि शुद्ध निवेश के लिए.
आखिर सही विकल्प कौन सा?
सोने में निवेश का कोई एक सही तरीका नहीं है. अगर लक्ष्य टैक्स बचत और लॉन्ग टर्म का निवेश है, तो SGB बेहतर माने जाते हैं. अगर बाजार के जरिए लिक्विड और पारदर्शी निवेश चाहिए, तो ETFs उपयुक्त हैं. छोटी रकम से शुरुआत करनी हो, तो डिजिटल गोल्ड आसान है. निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे परंपरा या ट्रेंड के बजाय अपने फाइनेंशियल गोल्स, समय सीमा और रिस्क क्षमता के आधार पर फैसला लें.
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.