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पाकिस्तान की सेना ने रविवार तड़के अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की। अल-जजीरा के मुताबिक सेना ने दावा किया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े सात कैंपों और ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें कई लोगों की मौत की खबर है।
सरकार ने इसे हालिया आत्मघाती हमलों के बाद जवाबी अटैक बताया। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन था। पाकिस्तान ने कहा कि उसके पास पुख्ता सबूत हैं कि हमले अफगानिस्तान की जमीन से संचालित नेटवर्क ने कराए।
एयरस्ट्राइक से कुछ घंटे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें दो सैनिक, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी मारे गए।
सोमवार को बाजौर में विस्फोटकों से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकरा दी गई। इस हमले में 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हुई। अधिकारियों ने हमलावर को अफगान नागरिक बताया।
इससे पहले 6 फरवरी को इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद (इमामबाड़ा) में आत्मघाती हमला हुआ था। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक, हमले में 31 लोगों की मौत हो गई है और 169 घायल हुए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।

अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में पाकिस्तानी हमलों से एक घर गिर गया।
अफगानिस्तान की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि अफगान सूत्रों के अनुसार पक्तिका में एक धार्मिक स्कूल पर ड्रोन हमला हुआ और नंगरहार प्रांत में भी कार्रवाई की गई।
पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान सरकार से मांग करता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से संचालित हो रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
पाकिस्तान की मांग- अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबान पर दबाव डाले
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह 2020 में दोहा में अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत तालिबान पर दबाव डाले, ताकि अफगान जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ न हो।
2020 का दोहा समझौता जिसे अफगानिस्तान में शांति प्रयास भी कहा जाता है। यह अमेरिका और तालिबान के बीच 29 फरवरी 2020 को कतर की राजधानी दोहा में हस्ताक्षरित हुआ था। यह समझौता अफगानिस्तान में 2001 से चल रहे युद्ध को समाप्त करने और अमेरिकी बलों की वापसी का रास्ता बनाने के लिए किया गया था।
तालिबान ने प्रतिबद्धता जताई कि वह अफगानिस्तान की जमीन को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले किसी भी समूह या व्यक्ति को इस्तेमाल नहीं करने देगा।
इसमें विशेष रूप से अल-कायदा और अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से संबंध तोड़ने और उन्हें अफगानिस्तान में भर्ती, प्रशिक्षण, फंडिंग या हमले की अनुमति न देने का वादा शामिल था।समझौते के बाद अमेरिका ने 2021 में अपनी सेना वापस बुला ली, जिसके बाद तालिबान ने तेजी से काबुल पर कब्जा कर लिया
अक्टूबर में हिंसक झड़पों के बाद तनाव बढ़ा
अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों में दोनों ओर सैनिकों और नागरिकों की मौत के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। कतर की मध्यस्थता से 19 अक्टूबर को युद्धविराम हुआ था, लेकिन तुर्किये के इस्तांबुल में बाद की वार्ता औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकी।
दरअसल, 9 अक्टूबर को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हवाई हमले हुए थे। तालिबान का कहना था कि ये हमले पाकिस्तान ने किए थे। हालांकि पाकिस्तान ने साफ तौर पर ये नहीं कहा कि ये हमले उसने किए, लेकिन उसने तालिबान को चेतावनी दी कि वह अपनी जमीन पर TTP को पनाह न दे।

9 अक्टूबर को काबुल पर हमले के बाद एक इमारत से धुआं उठता नजर आया।
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बना TTP
अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से TTP ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ रखा है। TTP को पिछले बारह साल में पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा आतंकवादी खतरा माना जा रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके सीमा पार अफगानिस्तान से ट्रेनिंग लेकर पाकिस्तान लौटते और हमला करते हैं।
हालांकि तालिबान दावा करता है कि वह TTP का समर्थन नहीं करता। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, देश में आतंकवादी हमले 2015 के बाद सबसे ज्यादा हो गए हैं और TTP ही इसकी मुख्य वजह है। वैश्विक आतंकवाद सूचकांक के इन हमलों की वजह से ही पाकिस्तान आतंकवाद प्रभावित देशों की सूची में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।
अमेरिकी हमले के जवाब में TTP का गठन
- 2001 में अमेरिकी आक्रमण के बाद: अफगानिस्तान में अमेरिकी हमले के कारण अफगान तालिबान, अल-कायदा और अन्य लड़ाके पाकिस्तान के FATA (फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरियाज) में शरण लेने लगे। पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ गठबंधन किया और FATA में अल-कायदा से जुड़े लड़ाकों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किए।
- 2002-2007 तक: पाकिस्तानी सेना ने FATA में कई ऑपरेशन किए, जिससे स्थानीय पश्तून कबीलों में गुस्सा पैदा हुआ। वे इसे अपनी स्वायत्तता पर हमला मानते थे।
- 2007 में लाल मस्जिद ऑपरेशन: जुलाई 2007 में इस्लामाबाद में लाल मस्जिद पर पाकिस्तानी सेना का ऑपरेशन एक बड़ा ट्रिगर पॉइंट बना। इससे कई जिहादी समूहों में एकजुट होने की भावना बढ़ी।
- दिसंबर 2007 में TTP का गठन: बैतुल्लाह मेहसूद के नेतृत्व में कई छोटे-छोटे जिहादी समूह संगठन के रूप में एकजुट हुए। इसका मकसद था पाकिस्तानी सरकार और सेना के खिलाफ जिहाद, शरिया लागू करना, अफगानिस्तान में अमेरिकी बलों के खिलाफ लड़ाई में सहयोग।
- TTP को अफगान तालिबान और अल-कायदा से समर्थन मिला, लेकिन यह पाकिस्तान राज्य के खिलाफ था।

पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों?
- 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था।
- TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है।
- TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं।
- 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए।
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के मुताबिक, बुर्किना फासो के बाद पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बन चुका है, जबकि 2024 में यह चौथे स्थान पर था।
- TTP के हमलों में 90% की वृद्धि हुई है।
- बलूच आर्मी (BLA) के हमलों में 60% बढ़ोतरी हुई है।
- इस्लामिक स्टेट- खुरासान (IS-K) ने अब पाकिस्तानी शहरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित इलाके हैं। देश भर की कुल आतंकी घटनाओं में से 90% इसी इलाके में हुईं।
रिपोर्ट में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को लगातार दूसरे साल पाकिस्तान का सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन बताया गया। 2024 में इस ग्रुप ने 482 हमले किए, जिसकी वजह से 558 मौतें हुई थीं, जो 2023 के मुकाबले 91% ज्यादा हैं।
दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है।

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