इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े एक मामले में पक्षकार बनने की अनुमति दे दी और उसे आगामी छह अप्रैल को संबंधित रिकॉर्ड जमा करने के निर्देश दिये।
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह आदेश एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
अदालत ने केंद्र को विरोधी पक्षकार के रूप में शामिल होने की अनुमति दी और उसे अगली सुनवाई में नागरिकता विवाद से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया।
केंद्र सरकार ने पिछली सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय से प्राप्त दस्तावेजों की गोपनीय प्रकृति का हवाला देते हुए अनुरोध किया था कि इस मामले की सुनवाई खुली अदालत में न की जाए। तब अदालत ने चैंबर में कार्यवाही की थी।
याचिकाकर्ता ने लखनऊ की एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत के 28 जनवरी 2026 के एक आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
शिशिर ने अपनी याचिका में भारतीय दंड संहिता, पासपोर्ट अधिनियम और शासकीय गोपनीयता अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए राहुल गांधी की नागरिकता से संबंधित आरोपों में मुकदमा दर्ज करने और विस्तृत जांच के निर्देश देने का अनुरोध किया है।
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