Adani Group Acquisition: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने दिवालिया हो चुकी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के लिए अडानी एंटरप्राइजेज के रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी है. इस क्रम में NCLT ने वेदांता लिमिटेड की चुनौती को भी खारिज कर दिया. जेपी ग्रुप की बड़ी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स पर कुल 57185 करोड़ रुपये के दावे हैं. इसके प्रमुख लेनदारों में नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) भी शामिल है.
क्यों दिवालिया हुई कंपनी?
कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे समेत कई पावर प्लांट्स और सीमेंट फैक्ट्रियों में भारी निवेश करने के लिए SBI और ICICI जैसे बैंकों से भारी कर्ज लिया. बाद में प्रोजेक्ट्स से सही कमाई न हो पाने और ब्याज दरें बढ़ने की वजह से कंपनी समय पर कर्ज नहीं चुका पाई और उसे डिफॉल्ट घोषित कर दिया गया. अब कर्ज में डूबी इसी कंपनी को अडानी ग्रुप 15000 करोड़ रुपये में खरीदने जा रहा है. अडानी ग्रुप ने जेपी एसोसिएट्स को खरीदने के लिए 15000 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था, जिसे अब NCLT ने मंजूरी दे दी है.
बैंकों को लौटाए जाएंगे उनके पैसे
जेपी एसोसिएट्स को खरीदने की रेस में अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड और डालमिया भारत जैसी कंपनियां शामिल थीं, लेकिन आखिरकार जीत अडानी ग्रुप को मिली. कंपनी को खरीदने के लिए अडानी ग्रुप से मिलने वाले 15000 करोड़ में से एक हिस्से का इस्तेमाल बैंकों का कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा. बैंकों की कमेटी भी इस डील के लिए अडानी ग्रुप के पक्ष में वोटिंग की थी.
अडानी ग्रुप को क्या-क्या मिलेगा?
- इस डील के तहत अडानी ग्रुप को जेपी ग्रुप की कई कीमती संपत्तियां मिलेंगी जैसे कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 3985 एकड़ की जमीन.
- जेपी ग्रुप के 5 लग्जरी होटल.
- जयप्रकाश पावर वेंचर्स के नाम की कंपनी में 24 परसेंट की हिस्सेदारी.
- सीमेंट बनाने वाली फैक्ट्रियां, जिनकी कैपिसिटी सालाना 6.5 मिलियन टन तक है.
वेदांता ने लगाई थी 17000 करोड़ की बोली
कंपनी को खरीदने के लिए वेदांता ने कुल 17000 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. हालांकि, कंपनी ने शुरुआत में 4000 करोड़ का तुरंत भुगतान करने और बाकी की रकम अगले 5-6 सालों में चुकाने की बात कही थी. वहीं, अडानी ग्रुप ने कहा कि वह 15000 करोड़ में से 6000 करोड़ रुपये तुरंत और बाकी रकम केवल 2 साल में चुकाने के लिए तैयार है इसलिए बैंकों ने अडानी ग्रुप को चुना.
वेदांता को किस बात पर ऐतराज?
जेपी एसोसिएट्स को खरीदने की प्रक्रिया जब शुरू हुई थी, तब वेदांता और डालमिया भारत जैसी कंपनियों ने डेडलाइन के भीतर ही अपनी-अपनी बोलियां जमा कर दी थीं. पहले कंपनी को खरीदने में अडानी ग्रुप ने दिलचस्पी नहीं दिखाई, लेकिन बाद में कंपनी ने इसे खरीदने के लिए एक बड़ा ऑफर पेश किया. वेदांता ने इसी बात का विरोध किया था. बैंकों और NCLT ने अडानी ग्रुप के प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार किया क्योंकि कंपनी बड़ी मात्रा में और जल्दी पैसा लौटा रही थी.
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