ईशान किशन जैसे बड़े बल्लेबाज का विकेट लेना, वह भी अपने डेब्यू मैच में… यह पल जिंदगी भर याद रहेगा। यह कहना है हरिद्वार के तेज गेंदबाज नवीन के. सिंह का, जिन्होंने बिना किसी एज-ग्रुप क्रिकेट (अंडर-16, अंडर-19) खेले सीधे सीनियर स्तर पर अपनी पहचान बनाई और अब आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स के कैंप तक पहुंच गए हैं।
क्रिकेट की दुनिया में अक्सर वही नाम सामने आते हैं, जो सिस्टम के तय रास्तों से आगे बढ़ते हैं। लेकिन हरिद्वार के जलालपुर कलां गांव के तेज गेंदबाज नवीन ने इस धारणा को तोड़ा है। बिना अंडर-16 या अंडर-19 खेले सीधे सीनियर क्रिकेट में जगह बनाई और अब आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स के साथ अपने अगले असाइनमेंट के लिए अहमदाबाद रवाना हो चुके हैं।
दैनिक भास्कर से खास बातचीत में नवीन ने अपने संघर्ष, सीख और सपनों को खुलकर साझा किया। अब सवाल-जवाब में पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
जवाब: शुरुआत में सबसे बड़ी कमी गाइडेंस की थी। पहले उत्तराखंड में सुविधाएं भी कम थीं। जैसे-जैसे मैं प्रोफेशनल क्रिकेट में आया, तब जाकर समझ आया कि चीजें कैसे काम करती हैं। अब माहौल पहले से काफी बेहतर है। सवाल: आपकी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र क्या है?
नवीन: फिटनेस। मैं हमेशा कहता हूं- आप क्रिकेट खेलकर फिट नहीं रह सकते, लेकिन अगर आप फिट हैं, तो लंबा क्रिकेट खेल सकते हैं। सवाल: परिवार का सपोर्ट कितना अहम रहा?
जवाब: शुरुआत में परिवार पूरी तरह आश्वस्त नहीं था, जो कि मिडिल क्लास फैमिली में सामान्य है। लेकिन जैसे-जैसे मैंने परफॉर्म किया, उनका सपोर्ट बढ़ता गया। आज वे मेरे साथ मजबूती से खड़े हैं। सवाल: करियर का टर्निंग पॉइंट क्या रहा?
नवीन: उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL)। सीजन-1 में उतना अच्छा नहीं किया, लेकिन सीजन-2 में 5 मैच में 10 विकेट लिए। मेरा माइंडसेट बदल गया था। वहीं से IPL फ्रेंचाइजियों के ट्रायल का मौका मिला। सवाल: डेब्यू मैच और ईशान किशन का विकेट, कैसा अनुभव था?
जवाब: बहुत खास। शुरू में दबाव था, क्योंकि ईशान सर बड़े खिलाड़ी हैं, लेकिन जब उन्हें आउट किया, तो वह पल शब्दों में नहीं बता सकता। वह विकेट जिंदगी भर याद रहेगा। सवाल: टी20 और वनडे में क्या फर्क महसूस हुआ?
जवाब: वनडे में आपको एक जगह गेंदबाजी करनी होती है, धैर्य रखना पड़ता है। टी20 में हर गेंद पर कुछ नया करना होता है। इस बदलाव को समझने में कोच मनीष शर्मा सर ने बहुत मदद की। सवाल: राजस्थान रॉयल्स कैंप का अनुभव कैसा रहा?
जवाब: बहुत सीखने को मिलता है। वहां दबाव जैसा कुछ नहीं होता, बस हेल्दी कॉम्पिटिशन रहता है। बड़े खिलाड़ियों को देखकर और उनसे सीखकर काफी सुधार होता है। सवाल: शेन बॉन्ड से क्या सीख मिली?
जवाब: उनका सीधा मंत्र है- पिच और कंडीशन के हिसाब से गेंदबाजी करो। ज्यादा सोचो मत, एक प्लान बनाओ और उसे सही से लागू करो। सवाल: आपकी स्ट्रेंथ और फोकस एरिया क्या है?
जवाब: मेरी बाउंसर मेरी सबसे बड़ी स्ट्रेंथ है। लेकिन अभी मैं अपनी यॉर्कर पर ज्यादा काम कर रहा हूं, ताकि उसे और बेहतर बना सकूं। सवाल: आगे का लक्ष्य क्या है?
जवाब: हर खिलाड़ी का सपना टीम इंडिया के लिए खेलना होता है। लेकिन फिलहाल मेरा फोकस घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है। सवाल: उत्तराखंड के युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब: कभी हार मत मानो। कई बार लगेगा कि कुछ नहीं हो रहा, लेकिन लगातार मेहनत करते रहो। कंसिस्टेंसी बहुत जरूरी है। मैंने एज-ग्रुप क्रिकेट नहीं खेला, फिर भी यहां तक पहुंचा हूं— अगर मेहनत है, तो मौका जरूर मिलेगा। ——————- ये खबर भी पढ़ें : उत्तराखंड नेशनल मास्टर्स फुटबॉल में चैंपियन बना: 40+ आयु वर्ग ने छत्तीसगढ़ को हराया, 50+ टीम उप-विजेता उत्तराखंड की 40+ आयु वर्ग की फुटबॉल टीम ने चंडीगढ़ में आयोजित ‘खेलो मास्टर्स नेशनल गेम्स 2026’ में राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब जीत लिया है। टीम ने कड़े मुकाबले में छत्तीसगढ़ को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। (पढ़ें पूरी खबर)
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