विरोध करने वालों ने प्रसिद्ध साबुन का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक गैर-कन्नड़ भाषी अभिनेत्री को चुने जाने पर सवाल उठाया है।
सरकार ने अपने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि भाटिया का चयन योग्यता और व्यावसायिक विचार-विमर्श के आधार पर किया गया।
राज्य के स्वामित्व वाली ‘कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड’ (केएसडीएल) द्वारा निर्मित उत्पादों की बाजार में उपस्थिति को मजबूत करने के प्रयासों के तहत भाटिया का कंपनी की ब्रांड एंबेसडर के रूप में दो साल का कार्यकाल मंगलवार से शुरू हो गया।
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केएसडीएल एक ऐसा संगठन है जिसकी विरासत एक सदी से अधिक पुरानी है।
भाटिया ने बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में संगठन के 57 उत्पादों का अनावरण किया, जिनमें ‘मैसूर सैंडल सोप’ भी शामिल है, जिसे अब एक नयी और आधुनिक पैकेजिंग में पेश किया गया है।
जिन उत्पादों को नयी पैकेजिंग प्रदान की गई है उनमें चंदन का तेल, चमेली के सुगंध वाले साबुन, इत्र, टूथपेस्ट, नारियल तेल, पेट्रोलियम जेली और जैविक उत्पाद शामिल हैं।
इस अवसर पर भाटिया को दर्शाते कई विज्ञापन भी जारी किए गए।
इसके अलावा संगठन की समृद्ध विरासत का वर्णन करने वाली दो ‘कॉफी टेबल बुक’ – सुगंधा सिरी और एरोमैटिक जर्नीज – का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर भाटिया ने कहा, ‘‘मैसूर सैंडल सोप सिर्फ एक साबुन नहीं है। यह भावनाओं, बचपन की और पुरानी यादों से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह शुद्धता और प्रामाणिकता का एक आदर्श मिश्रण है। यह साबुन लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान रखता है और इस संस्था के ब्रांड एंबेसडर के रूप में जुड़ना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।’’
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इस बीच, सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कई लोगों ने राज्य सरकार के इस फैसले की आलोचना की, जिसमें कन्नड़ अभिनेत्री के बजाय भाटिया को राज्य के प्रतिष्ठित ब्रांड का एंबेसडर चुना गया था।
चिक्कबाल्लापुरा से भाजपा सांसद और राज्य के पूर्व मंत्री के. सुधाकर ने‘एक्स’ पर एक पोस्ट में राज्य सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘हमारे अपने कर्नाटक के कई सितारे राज्य के मशहूर अंतरराष्ट्रीय ब्रांड ‘मैसूर सैंडल सोप’ के ब्रांड एंबेसडर बनने के काबिल थे, लेकिन करोड़ों रुपये देकर दूसरे राज्य की, एक गैर कन्नड़ भाषी फिल्म अभिनेत्री को ब्रांड एंबेसडर चुना गया। यह कांग्रेस पार्टी की कन्नड़ विरोधी मानसिकता का एक और सबूत है।’’
सुधाकर ने कहा, ‘‘राम्या, रश्मिका मंदाना, श्रीनिधि शेट्टी, पूजा हेगड़े, रुक्मिणी वसंत और कई अन्य अभिनेत्रियां कन्नड़ फिल्मों में लोकप्रिय हैं और अन्य भाषाओं के फिल्म उद्योग में भी इनकी काफी मांग है। इन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कन्नड़ फिल्म जगत का नाम रोशन किया है।’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का अपने राज्य की अभिनेत्रियों के बजाय दूसरों को प्राथमिकता देने का रवैया न केवल कर्नाटक की प्रतिभाओं का अपमान है, बल्कि ‘मैसूर सैंडल सोप’ की पहचान का भी घोर अपमान है।
उन्होंने कहा, ‘‘कन्नड़ भाषी लोग इस कन्नड़ विरोधी कांग्रेस पार्टी को कभी माफ नहीं करेंगे।’’
कई अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने भी सरकार के इस कदम की आलोचना की, जबकि कुछ ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि इस भूमिका के लिए भाटिया का चयन उचित है क्योंकि यह साबुन कर्नाटक के भीतर की तुलना में राज्य के बाहर अधिक बिकता है। उन्होंने तर्क दिया कि उत्तर भारत में इसका विशाल बाजार है।
राज्य के उद्योग मंत्री एम बी पाटिल ने कहा कि भाटिया को योग्यता के आधार पर ब्रांड एंबेसडर के रूप में चुना गया है और यह पूरी तरह से एक व्यावसायिक निर्णय है क्योंकि इस साबुन की बिक्री केवल कर्नाटक तक ही सीमित नहीं है।
केएसडीएल के अध्यक्ष सी एस अप्पाजी नाडागौड़ा ने कहा कि संगठन का कारोबार इस साल 2,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है जबकि मुनाफा 500 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा।
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