अमेजन, फ्लिपकार्ट और ब्लिंकिट जैसी कंपनियों की सफलता ने कार्डबोर्ड इंडस्ट्री की किस्मत खोल दी है. प्लास्टिक पर बढ़ती पाबंदी और ईको फ्रेंडली पैकेजिंग की मांग ने इस बिजनेस को एक ऐसा बूस्ट दिया है कि इसकी डिमांड साल के 12 महीने और 365 दिन बनी रहती है. यह एक ऐसा सदाबहार काम है जिसकी चमक आने वाले दशकों में कम नहीं होने वाली. हां, इतना जरूर है कि कार्डबोर्ड से बॉक्स बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए आपको ठीक-ठाक पैसे की जरूरत होगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि गत्ते के डिब्बे बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें महंगी आती हैं.
कितना लगेगा पैसा?
कार्डबोर्ड का बिजनेस शुरू करने के लिए आपको मशीनें खरीदनी होगी. शुरुआत में कितना पैसा लगाना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप किस क्षमता का प्लांट लगाना चाहते हैं.
ऑटोमेटिक प्लांट (बड़े स्तर का बिजनेस): अगर आप बड़े पैमाने पर और प्रीमियम फिनिशिंग के साथ काम शुरू करना चाहते हैं, तो आपको कम से कम 80 लाख रुपये के निवेश की जरूरत होगी. ऑटोमेटिक मशीनों की कीमत ही करीब 48 लाख रुपये से शुरू होती है. इसमें लेबर की जरूरत कम होती है और उत्पादन की गति बहुत तेज होती है.
सेमी-ऑटोमेटिक प्लांट (मध्यम स्तर का बिजनेस): जो लोग कम बजट में शुरुआत करना चाहते हैं, वे 35 लाख रुपये में अपना प्लांट सेटअप कर सकते हैं. इंडियामार्ट जैसी वेबसाइट्स पर 8 लाख से 15 लाख रुपये के बीच अच्छी सेमी-ऑटोमेटिक मशीनें मिल जाती हैं. एक 15 लाख वाली मशीन हर घंटे लगभग 50 बॉक्स तैयार कर सकती है. हालांकि, इसमें फिनिशिंग के कुछ कामों के लिए आपको मैनपावर की जरूरत पड़ेगी.
कच्चा माल
इसके लिए रॉ क्रॉफ्ट पेपर, प्लाई कोरूगेटड बोर्ड और रीसाइकल्ड कार्डबोर्ड की जरूरत होगी. रॉ क्राफ्ट पेपर की कीमत औसतन ₹22,000 से ₹30,000 प्रति टन, 3-प्लाई कोरुगेटेड बोर्ड ₹35,000 से ₹45,000 प्रति टन तथा रीसाइकल्ड कार्डबोर्ड (स्क्रैप) ₹8 से ₹15 प्रति किलोग्राम मिल जाता है. एक स्टैंडर्ड 3-प्लाई बिना प्रिंट वाला बॉक्स ₹6 से ₹15 में तैयार हो जाता है. वहीं, अधिक मजबूती वाले 5-प्लाई हेवी-ड्यूटी बॉक्स की लागत ₹12 से ₹30 और रंगीन ब्रांडिंग या कस्टम प्रिंटिंग वाला बॉक्स ₹18 से ₹60 में बन जाता है.
जगह की बात करें तो प्लांट लगाने और तैयार माल को रखने के लिए आपको कम से कम 5,000 स्क्वॉयर फीट जगह की जरूरत होगी. ध्यान रहे कि प्लांट शहर के शोर-शराबे या भीड़भाड़ वाले इलाके से थोड़ा हटकर हो, ताकि वाहनों में माल की लोडिंग और अनलोडिंग आसानी से हो सके.
मुनाफे का गणित
इस बिजनेस में प्रॉफिट मार्जिन आपकी मार्केटिंग और क्लाइंट नेटवर्क पर टिका है. ई-कॉमर्स कंपनियों के अलावा स्थानीय मिठाई की दुकानें, जूता चप्पल निर्माता, दवा कंपनियां और इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर आपके संभावित ग्राहक हैं. अगर आप एक मजबूत क्लाइंट बेस बनाने में सफल रहते हैं और सीधे कंपनियों से कांट्रैक्ट हासिल कर लेते हैं, तो शुरुआती दौर में भी आप 5 से 10 लाख रुपये सालाना शुद्ध मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं.
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