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सवाल: मैं इंदौर में रहती हूं। मेरी शादी को 9 साल हो गए हैं। हमारी एक बेटी है, जो पहली क्लास में पढ़ती है। हम दोनों वर्किंग हैं। 2 महीने पहले हसबैंड का प्रमोशन हुआ और वो जबलपुर चले गए। मैं नहीं चाहती थी कि वो प्रमोशन के लिए शहर छोड़ें। मेरे लिए हम दोनों का साथ होना ज्यादा जरूरी था। लेकिन वो नहीं माने। अब मैं बिल्कुल अकेली पड़ गई हूं। घर–जॉब–बेटी की जिम्मेदारियां अकेले संभाल रही हूं। मैं बहुत फ्रस्टेट हो रही हूं। क्या करूं?
एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा
जवाब: सबसे पहले तो शुक्रिया। आपने अपनी परेशानी को इतने स्पष्ट तरीके से लिखा है। कई बार जीवन में ऐसे मोड़ आते हैं, जहां कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। अगर किसी फैसले का असर पूरे परिवार पर पड़े तो यह और कठिन होता है।
आप एक मजबूत महिला हैं, जो घर, जॉब और बच्ची की जिम्मेदारी एक साथ संभाल रही हैं। अगर पति दूसरे शहर चले गए हैं और आपको उनका साथ नहीं मिल पा रहा है तो फ्रस्ट्रेशन होना नॉर्मल है। आइए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और साथ मिलकर कोई रास्ता निकालते हैं।
आप और आपके हसबैंड दोनों सही हैं
आपकी स्थिति ऐसी है, जहां कोई गलत नहीं है। आपके हसबैंड प्रमोशन लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं, जो करियर के लिए जरूरी है। जीवन में पैसे कमाना, परिवार की बेहतरी के लिए सोचना ये सब सही है। कल को आपकी बच्ची बड़ी होगी, उसकी पढ़ाई के खर्चे बढ़ेंगे, परिवार के कई सपने पूरे करने होंगे। इसके लिए उनका प्रमोशन लेना जरूरी है।
हालांकि आपका पॉइंट भी वैलिड है। आप अकेली पड़ रही हैं। जॉब के साथ घर और बच्ची की देखभाल अकेले करनी पड़ रही है। ऐसे में थकान और फ्रस्ट्रेशन हो सकती है। ऐसे में अगर मन में ये फीलिंग घर कर जाए कि “वो मेरी परवाह नहीं करते या वो सेल्फिश हैं,” तो ये रिश्ते के लिए खतरनाक है।
हमें समझना होगा कि दोनों ही अपनी जगह सही हैं। समस्या फैसले में नहीं, बल्कि ‘कम्युनिकेशन की कमी’ में है। अब आपको पति के फैसले पर उलझने की बजाय मौजूदा स्थिति पर बात करनी चाहिए। इसमें सबसे पहला चैलेंज है, ‘लॉन्ग डिस्टेंस मैरिज।’
लॉन्ग डिस्टेंस मैरिज में हैं ये चुनौतियां
आपके हसबैंड प्रमोशन लेकर दूसरे शहर चले गए हैं यानी आप लॉन्ग डिस्टेंस मैरिज में हैं। इसकी कुछ अपनी चुनौतियां हैं। सभी चुनौतियां ग्राफिक में देखिए-

आपको इन चैलेंजेस से डील करते हुए फ्रस्ट्रेशन हो सकता है, छोटी-छोटी चीजों पर गुस्सा आ सकता है।
लॉन्ग डिस्टेंस मैरिज के साइकोलॉजिकल असर
पार्टनर के दूर जाने पर अकेलापन महसूस हो सकता है, चिड़चिड़ाहट हो सकती है। इसके अलावा घर की सिचुएशंस से अकेले डील करने से शारीरिक-मानसिक थकान हो सकती है।
आप दिनभर जॉब करती हैं, शाम को घर आकर बच्ची का होमवर्क, खाना बनाना ये सब आपको ब्रेकडाउन की कगार पर ला सकता है। साइकोलॉजी में इसे ‘इमोशनल बर्नआउट’ कहते हैं। इसके सभी साइकोलॉजिकल इफेक्ट ग्राफिक में देखिए-

बातचीत ही समस्या का हल
अब ये समझते हैं कि ऐसी स्थिति में पति आपका कितना साथ दे रहे हैं। उनके फैसले में कोई समस्या नहीं है। देखना ये है कि वो इस सिचुएशन को आपके साथ मिलकर कैसे डील करते हैं।
वह प्रमोशन लेकर दूसरे शहर गए हैं, ये फैसला भी कहीं-न-कहीं परिवार के लिए ही है। लेकिन अगर वो आपकी फीलिंग्स को इग्नोर कर रहे हैं, या बात नहीं कर रहे, तो वो चिंता की बात हो सकती है। आपके सवाल से लगता है कि दोनों के बीच सिर्फ कम्युनिकेशन की कमी है। ऐसे में मिलकर बातचीत करना और बीच का रास्ता निकालना ही बेहतर है।

बीच का रास्ता निकालें
इसके लिए बेहतर है कि वीकेंड पर समय निकालकर साथ बैठें और इस बारे में खुलकर बात करें। आप अपनी फीलिंग्स शेयर करें। पति से क्लियरली बताएं, “मैं थक जाती हूं, अकेले सबकुछ संभालना मुश्किल है। मुझे तुम्हारी मदद चाहिए।” कई बार महिलाएं सोचती हैं कि पार्टनर खुद समझ जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं होता है। आपको खुलकर अपनी बात कहनी होगी और मदद मांगनी होगी।
फिजिकल हेल्प के लिए क्या करें?
आप अकेले घर संभाल रही हैं, तो थकान से बचने के लिए मदद लें। घर के काम के लिए हाउस-हेल्प रखें। बच्ची को ट्यूशन दिलाएं और प्ले ग्रुप जॉइन कराएं। घर की सफाई के लिए मंथली क्लीनिंग सर्विस लें। इससे आपको थोड़ा रिलीफ मिलेगा। घर का मैनेजमेंट भी ठीक से होगा। ग्राफिक से समझिए-

इमोशनल सपोर्ट भी जरूरी
हसबैंड के दूर रहने पर इमोशनल सपोर्ट की ज्यादा जरूरत महसूस होने लगती है। हालांकि वह दूसरे शहर में रहकर भी आपकाे सपोर्ट कर सकते हैं। इसके लिए-
- उनसे रोज फोन पर बात करें।
- वीडियो कॉल में अपनी बेटी के साथ मिलकर कनेक्टेड रहें।
- हसबैंड से कहें कि वो आपकी बातें सुनें, सॉल्यूशन दें।
- कोई बड़ा निर्णय मिलकर लें।
- महीने में कम-से-कम एक बार मिलने की कोशिश करें।
अकेलेपन से कैसे डील करें?
इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें-
- दोस्तों से मिलें।
- फैमिली से बात करें।
- बच्ची के साथ पार्क जाएं, योग करें।
- डेली जर्नलिंग शुरू करें।
- रोज अपनी फीलिंग्स लिखें।
- जरूरत पड़े तो काउंसलर से बात करें।
बच्चे पर इस सिचुएशन का असर न पड़ने दें
आपकी बेटी अभी छोटी है, उसे माता-पिता दोनों की जरूरत है। हसबैंड से कहें कि वो वीडियो कॉल से होमवर्क में हेल्प करें। आप भी पॉजिटिव रहें, ताकि बच्ची खुश रहे। अगर वो अपने पिता को मिस करती है तो साथ में फोटो देखें, स्टोरीज शेयर करें।

अगर नकारात्मकता हावी हो तो क्या करें?
मन में निगेटिव विचार ज्यादा आने लगें, जैसे-
- “दूर रहने से कहीं रिश्ता तो नहीं टूट जाएगा”
- “पति मेरी सिचुएशन नहीं समझते हैं।”
ऐसे में तुरंत बात करें। इसे अंदर दबाने से समस्या बढ़ेगी। याद रखें, ये स्थिति टेम्पररी हो सकती है। कई कपल्स लॉन्ग डिस्टेंस में खुश रहते हैं, बस कम्युनिकेशन स्ट्रॉन्ग होना चाहिए।

आखिरी बात
अंत में यही कहूंगी कि खुद को दोष न दें। आप मजबूत हैं, ये फेज गुजर जाएगा। हसबैंड से कहें कि आपको सपोर्ट चाहिए, और वो देंगे। रिश्ता दोनों की समझ से चलता है।
आप एक प्यारी मां और पत्नी हैं। ये स्थिति आपको और मजबूत बनाएगी। बच्ची के लिए आप रोल मॉडल हैं। आप अकेली नहीं हैं, लाखों महिलाएं ऐसी स्थिति से गुजरती हैं और जीतती हैं।
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आपने जो समस्या बताई है, ये अक्सर जॉइंट फैमिली में देखने को मिलती है। यह कोई आदर्श स्थिति नहीं है। बहुत ज्यादा रोक-टोक हो तो परेशानी जायज है। लेकिन पता है, जीवन की और इंसान की सबसे अच्छी बात क्या है। वो ये कि हममें खुद को बदलने की असीमित क्षमता है। आइए आपकी स्थिति को बेहतर बनाने के तरीकों पर बात करते हैं। आगे पढ़िए…
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