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एक मौलाना ने बेहद ऊंचे स्वर में दहाड़ते हुए जनरल मुनीर को चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तानी हुकूमत और सेना परोक्ष रूप से इजरायल का पक्ष लेती है, तो वहां की अवाम भी डंके की चोट पर ईरान के साथ खड़ी होगी। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि अब यह देखा जाएगा कि किसे सरहद के पार भेजा जाता है। सेना प्रमुख पर तंज कसते हुए दूसरे वक्ताओं ने कहा कि मुनीर लोगों को ईरान जाने की सलाह देते हैं, लेकिन जनता का मानना है कि सेना प्रमुख की वफादारी इजरायल के प्रति है। मौलानाओं ने यहां तक कह दिया कि मुनीर इस काबिल भी नहीं हैं कि उन्हें किसी पाक जमीं पर दफन होने का मौका मिले। मौलाना ने चुनौती देते हुए कहा कि मैं आर्मी चीफ को ये पैगाम देता हूं… आसिम मुनीर अगर तुम खुलेआम इजरायल का साथ देते हो तो हम भी खुलेआम ईरान का साथ देंगे। देखते हैं तुम हमें ईरान भेजोगे या हम तुम्हें इजरायल भेजेंगे।
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आपको बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयतुल्ला अली खामिनई की मौत के बाद पाकिस्तान में शिया समुदाय के लोगों ने अमेरिका और इजराइल के विरोध में प्रदर्शन किया था। कराची में यूएस एंबेसी के बाहर बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग जुटे थे। इस विरोध प्रदर्शन में कई जगहों से हिंसा की खबरें आई थी। 20 लोगों की मौत की भी खबर थी अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक जिसके बाद पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने यह चेतावनी दी थी कि दूसरे देश की घटनाओं के आधार पर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिया धर्म गुरुओं ने मुनीर की इस चेतावनी को दिल पर लगा लिया। उनका आरोप था कि ऐसा कहकर मुनीर शिया समुदाय पर हिंसा का सारा ब्लेम डाल रहे हैं। जिसके बाद मुनीर ने कहा कि अगर ईरान से इतना ही प्यार है तो वहीं चले जाए। इस स्टेटमेंट पर शिया धर्म गुरु भी भड़क गए हैं। शियाओं का कहना है कि जो पहले तीन खलीफा बने वो गलत तरीके से बने। अली को सुन्नियों ने चौथा खलीफा माना। जबकि शिया ने अपना पहला इमाम माना। खिलाफत की जगह शियाओं में इमामत मिली। और फिर इस तरह शियाओं के 12 इमाम हुए। पहले अली, दूसरे अली के बेटे हसन, तीसरे हुसैन। हुसैन अली के दूसरे बेटे थे। इन सबको सुन्नी भी मानते हैं। लेकिन खिलाफत और इमामत के विवाद में सुन्नी और शिया में मतभेद हो गए। मुस्लिम आबादी में बहुसंख्य सुन्नी मुसलमान हैं। शिया की तादाद कम है। दोनों समुदाय सदियों से एक साथ रहते आए हैं।
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गिलगित में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक जलसा नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना की पकड़ ढीली होने का संकेत है। लोग अब खुलकर जनरल आसिम मुनीर के खिलाफ खड़े हो रहे हैं और उनकी नीतियों को इस्लाम विरोधी करार दे रहे हैं। यह पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान के प्रति असंतोष अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां जनता सीधे सेना की आंखों में आंखें डालकर बात कर रही है।
Protest in Gilgit against Asim Munir’s misconduct toward Shia scholars:
“Asim Munir, if you openly stand in support of Israel, then we will also openly stand in support of Iran.
Let’s see whether you send us to Iran or we send you to Israel.” pic.twitter.com/yHbU0CaaeT— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) March 22, 2026
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