WPI Increase : थोक मूल्य आधारित महंगाई दर जनवरी में बढ़कर 2 फीसदी के आसपास पहुंच गई है. यह लगातार तीसरा महीना है जब थोक महंगाई में बढ़ोतरी दिखी है. इससे पहले खुदरा महंगाई का आंकड़ा भी जनवरी में बढ़कर करीब 3 फीसदी के आसपास चला गया था. खास बात ये है कि थोक महंगाई में बढ़ोतरी खाद्य उत्पादों और गैर खाद्य उत्पादों दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से आई है.
जनवरी में थोक महंगाई की दर बढ़कर 1.83 फीसदी पहुंच गई है.
आंकड़ों में बताया गया है कि खाद्य वस्तुओं, गैर-खाद्य चीजों और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में मासिक आधार पर बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह रही. थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर पिछले साल जनवरी में 2.51 फीसदी जबकि दिसंबर 2025 में 0.83 फीसदी रही थी. उद्योग मंत्रालय ने बताया कि जनवरी 2026 में थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह मूल धातुओं के विनिर्माण, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य चीजों, खाद्य वस्तुओं और वस्त्रों आदि की कीमतों में वृद्धि रही.
खाने-पीने की चीजों में कितनी बढ़ोतरी
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 1.55 फीसदी रही जबकि दिसंबर में इसमें 0.43 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. सब्जियों के मामले में जनवरी में महंगाई दर 6.78 फीसदी रही जबकि दिसंबर में इसमें 3.50 फीसदी की गिरावट आई थी. विनिर्मित उत्पादों में थोक महंगाई जनवरी में बढ़कर 2.86 फीसदी हो गई जो दिसंबर में 1.82 फीसदी थी.
फैक्ट्री उत्पादों की महंगाई दर भी बढ़ी
गैर-खाद्य उत्पादों की श्रेणी में महंगाई जनवरी में तेज उछाल के साथ 7.58 फीसदी पहुंच गई जबकि दिसंबर में यह 2.95 फीसदी थी. इसका मतलब है कि गैर खाद्य उत्पादों की कीमतों में करीब तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है. ईंधन और बिजली क्षेत्र में महंगाई दर में गिरावट जारी रही. जनवरी में यह 4.01 फीसदी रही जो दिसंबर में 2.31 फीसदी थी. सरकार की ओर से पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, देश की खुदरा महंगाई दर जनवरी में बढ़कर 2.75 फीसदी हो गई.
किस महंगाई से ज्यादा असर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ब्याज दरों के निर्धारण के लिए खुदरा महंगाई को आधार बनाता है. केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अभी तक नीतिगत दर रेपो में 1.25 फीसदी की कटौती है जो अब 5.5 फीसदी है. जाहिर है कि आम आदमी पर खुदरा महंगाई का ज्यादा असर पड़ता है. लेकिन, असली बात ये है कि थोक महंगाई के आधार पर ही खुदरा महंगाई तय की जाती है. अगर किसी महीने में थोक महंगाई बढ़ी है तो अगले महीने खुदरा महंगाई पर इसका असर दिख सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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