सबसे अहम बात ये है कि अमेरिका ने कुछ खास टेक्सटाइल और अपैरल गुड्स पर जीरो टैरिफ देने का वादा किया है लेकिन इसके लिए शर्त है कि बांग्लादेश वाले प्रोडक्ट्स में अमेरिकी कॉटन या मैन-मेड फाइबर का इस्तेमाल किया जाए. ये वॉल्यूम अमेरिका से बांग्लादेश को जाने वाले ऐसे टेक्सटाइल इनपुट्स की मात्रा पर निर्भर करेगा. मतलब जितना ज्यादा अमेरिकी कॉटन बांग्लादेश खरीदेगा उतना ज्यादा उसके तैयार कपड़े अमेरिका में बिना टैक्स के जा सकेंगे.
अमेरिकी कॉटन का ज्यादा इस्तेमाल करेगा बांग्लादेश
भारत के लिए ये डील चिंता भी बन सकती है, क्योंकि बांग्लादेश भारत का बहुत बड़ा कॉटन खरीदार है. भारत से बांग्लादेश को जाने वाले रॉ कॉटन(Raw Cotton) का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बांग्लादेश लेता है. 2024 में अमेरिका ने दुनिया भर में लगभग 5 बिलियन डॉलर का ऐसा कॉटन एक्सपोर्ट किया था और बांग्लादेश उसका पांचवां सबसे बड़ा खरीदार था जिसमें 245 मिलियन डॉलर का अमेरिकी कॉटन गया. लेकिन भारत बांग्लादेश को डाइड और डेनिम कॉटन फैब्रिक जैसी कैटेगरी में 90 प्रतिशत तक सप्लाई करता है.
अब अगर बांग्लादेश अमेरिकी कॉटन ज्यादा इस्तेमाल करेगा तो भारत से आने वाले कॉटन और यार्न का एक्सपोर्ट कम हो सकता है. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भारत के 1.5 बिलियन डॉलर के कपास एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है जिसमें से 600-650 मिलियन डॉलर का हिस्सा रॉ कॉटन और यार्न से जुड़ा है. CNBC-TV18 से बातचीत में पर्ल ग्लोबल के एमडी और ग्रुप प्रेसिडेंट पल्लब बनर्जी ने कहा कि बांग्लादेश पहले से ही भारत के मुकाबले ज्यादा कॉम्पिटिटिव है, जिसका कारण उसका इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम, कम मैन्युफैक्चरिंग लागत और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर है. यह डील बांग्लादेश को थोड़ा और कॉम्पिटिटिव बनाएगी, लेकिन इसे बहुत बड़ा बदलाव नहीं कहा जा सकता.
भारत-बांग्लादेश की सप्लाई चेन में आएगी दरार
ये डील भारत के स्पिनिंग इंडस्ट्री को भी मुश्किल में डाल सकती है. भारत-बांग्लादेश की सप्लाई चेन में गहराई से जुड़ा हुआ है. बांग्लादेश अपने रेडीमेड गारमेंट्स में भारत से कॉटन यार्न और फैब्रिक लेता है. अगर बांग्लादेश अमेरिकी कॉटन पर शिफ्ट हो गया तो भारत से आने वाले इंटरमीडिएट प्रोडक्ट्स की डिमांड घट सकती है. इससे भारतीय स्पिनर्स को कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और उनकी बिक्री पर असर पड़ेगा. बांग्लादेश के पास अब अमेरिकी बाजार में ज्यादा फायदा होगा क्योंकि उसके गारमेंट्स सस्ते हो जाएंगे.
अमेरिकी बाजार में भारत के रेडीमेड कॉटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 3.6 बिलियन डॉलर के हैं. इनमें से 15 प्रतिशत तक यानी करीब 500 मिलियन डॉलर के प्रोडक्ट्स जैसे कॉटन शर्ट्स, बेड लिनेन, टेबल लिनेन और फर्निशिंग आर्टिकल्स पर कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है. बांग्लादेश के गारमेंट्स जीरो टैरिफ पर आएंगे जबकि भारत के प्रोडक्ट्स पर 18 प्रतिशत टैरिफ रहेगा. इससे भारत की मार्केट शेयर पर दबाव आएगा. हालांकि, भारत-अमेरिका डील में टैरिफ 18 प्रतिशत है जो बांग्लादेश के 19 प्रतिशत से थोड़ा कम है लेकिन जीरो टैरिफ वाला क्लॉज बांग्लादेश को बड़ा फायदा देता है.
अमेरिका को मिलेंगे बड़े फायदे
ये डील अमेरिका के लिए फायदेमंद है क्योंकि अमेरिका अपनी एक्स्ट्रा कॉटन को बांग्लादेश भेजकर बाजार बना सकता है. पहले अमेरिका चीन को 6 बिलियन डॉलर का एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करता था जिसमें 1.5 बिलियन कॉटन का था लेकिन मार्च 2025 में चीन ने 15 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया तो एक्सपोर्ट 90 प्रतिशत गिर गया. अब अमेरिका दक्षिण एशिया की तरफ ध्यान दे रहा है. बांग्लादेश ने भी बदले में 3.5 बिलियन डॉलर के अमेरिकी एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स जैसे व्हीट, सोय, कॉटन और कॉर्न खरीदने का वादा किया है.
इस डील के चलते भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लोग चिंतित हैं लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि असर सीमित रह सकता है. अमेरिकी कॉटन बांग्लादेश पहुंचने तक महंगा पड़ता है जबकि भारत की जियोग्रॉफिकल लोकेशन के कारण सस्ता और तेज सप्लाई होती है. फिर भी अगर बांग्लादेश अमेरिकी कॉटन ज्यादा लेगा तो भारत के एक्सपोर्ट में 2-3 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. ये डील भारत-अमेरिका ट्रेड डील के फायदों को कुछ हद तक ऑफसेट कर सकती है. अमेरिका-बांग्लादेश डील साउथ एशिया के टेक्सटाइल ट्रेड को बदल सकती है. ऐसे में भारत को अपनी सप्लाई चेन मजबूत करनी होगी और नए बाजार तलाशने होंगे. एक तरफ बांग्लादेश को अमेरिकी बाजार में एक्सेस मिलेगा लेकिन दूसरी ओर भारत के कपास व्यापार का एक चौथाई हिस्सा प्रभावित हो सकता है.
टेक्सटाइल शेयर्स में लगातार दूसरे दिन गिरावट
अमेरिका और बांग्लादेश के बीच व्यापार समझौता पूरा होने की घोषणा के बाद 11 फरवरी को लगातार दूसरे दिन टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई. पर्ल ग्लोबल इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 6% तक गिर गए. गोकलदास एक्सपोर्ट्स के शेयर लगभग 4% नीचे आ गए और के.पी.आर. मिल और अरविंद के शेयरों में भी करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई. अमेरिका और बांग्लादेश की ट्रेड डील की खबर के बाद से ही टेक्सटाइल सेक्टर में निवेशकों ने बिकवाली शुरू की है.
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