फिलहाल बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली है. इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए के अनुसार 20 फरवरी को 24 कैरेट सोना 132 रुपये सस्ता होकर करीब 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. वहीं चांदी 792 रुपये गिरकर लगभग 2.45 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई.
चांदी में इतनी तेजी का दावा क्यों?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चांदी की मांग बढ़ने के 3 मुख्य कारण हैं:
- सप्लाई में कमी: बाजार में चांदी की उतनी उपलब्धता नहीं है जितनी मांग है.
- नई तकनीक: सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों यानी ईवी के निर्माण में चांदी का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है.
- बड़े निवेशक: अगर बड़े संस्थान चांदी में भारी निवेश शुरू करते हैं, तो कीमतें आसमान छू सकती हैं.
कैसे पहुंचेगा भाव 10 लाख तक?
अगर ग्लोबल मार्केट में चांदी $309 प्रति औंस पहुंचती है, तो भारत में इसकी कीमत कुछ इस तरह होगी:
डॉलर से रुपया: $309 लगभग 26,265 रुपये (प्रति औंस)
किलोग्राम में भाव: करीब 8,44,500 रुपये.
टैक्स और ड्यूटी: इसमें 15% इंपोर्ट ड्यूटी, 3% GST और मेकिंग चार्ज जोड़ने के बाद कुल कीमत 10,05,000 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब बैठती है.
क्या यह पक्का है?
नहीं, यह सिर्फ एक ‘एक्सट्रीम’ यानी सबसे ऊंचा अनुमान है. एक्सपर्ट ने 3 स्थितियां बताई हैं:
- बेस केस: भाव 4.40 लाख रुपये प्रति किलो तक.
- मिड केस: भाव 6.50 लाख रुपये प्रति किलो तक.
- हाई केस: भाव 10 लाख रुपये प्रति किलो तक.
भारत में चांदी की कीमत कई फैक्टर मिलकर तय करते हैं.
- अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमत
- डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट
- इंपोर्ट ड्यूटी और टैक्स
- डिमांड और सप्लाई
- लोकल मार्केट प्रीमियम
देश के अलग-अलग शहरों में चांदी की कीमत थोड़ी अलग हो सकती है. इसमें ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज, ज्वेलर्स का मार्जिन और लोकल डिमांड का असर पड़ता है. भारत में रोजाना सोना-चांदी के दाम जारी करने में इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन जैसी संस्थाओं की अहम भूमिका होती है.
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.