बकौल वित्त मंत्री, “बजट में श्रम-प्रधान क्षेत्रों (labour-intensive sectors) पर विशेष जोर दिया गया है ताकि उनके पास सुधार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकें. इसके साथ ही, यह उन पारंपरिक उद्योगों (legacy industries) पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है जो पुनरुद्धार की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनके लिए फंड की व्यवस्था की गई है.”
वित्त मंत्री ने आगे कहा,
हम राज्य सरकारों का स्वागत करते हैं कि वे मेगा फूड पार्क, आईटी पार्क, स्मार्ट सिटी और जलमार्ग आदि स्थापित करने में सहायता के लिए केंद्र सरकार से संपर्क करें.
कोई भी राज्य पीएम गति शक्ति के मानकों को पूरा करते हुए केंद्र के पास आ सकता है, बशर्ते उनके पास एक व्यावहारिक प्रस्ताव (viable proposition) हो. कोई भी राज्य ‘संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा हब’ (Allied and Health Services hubs) स्थापित करने का अनुरोध कर सकता है, जहां हम चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का इरादा रखते हैं. राज्य इस पहल का हिस्सा बनने की मांग कर सकते हैं, जिसके तहत चिकित्सा शिक्षा और मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों के सभी पहलुओं को एक ही क्षेत्र में केंद्रित किया जा सकता है. इसलिए कोई भी राज्य इसके लिए पात्र हो सकता है. भारत के पास चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) का जो लाभ है, उसे देखते हुए यह एक बड़ा और भविष्योन्मुखी प्रस्ताव है. यह बहुउद्देश्यीय, बहु-विशिष्ट संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बनेगा, जिसके माध्यम से हम चिकित्सा पर्यटन को और बढ़ावा दे सकेंगे.
हमने कहा है कि शिक्षा पूरी करने के बाद कौशल (Skills) सीखने के लिए जगह तलाशने के बजाय, कौशल विकास के तत्व को शिक्षा में ही शामिल किया जा सकता है. इससे पढ़ाई खत्म होने पर छात्र यह कह सकेंगे कि मैं उद्यमी बन सकता हूँ. इस तरह के मेगा सेंटर किसी भी राज्य के औद्योगिक क्लस्टर के पास स्थापित किए जा सकते हैं. अतः शिक्षा हब के रूप में ये मेगा उद्यमिता निर्माण केंद्र (Mega entrepreneurship building centres) किसी भी राज्य में आ सकते हैं. हम राज्यों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं ताकि उच्च शिक्षा के इन विशाल केंद्रों को बढ़ावा दिया जा सके और छात्र वहां से उद्यमी बनकर निकलें.
वर्ष 2026-27 में राज्यों को हस्तांतरित किए जाने वाले कुल संसाधन, जिसमें करों में राज्यों की हिस्सेदारी और केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के तहत जारी की जाने वाली राशि शामिल है, अनुमानित रूप से 25.44 लाख करोड़ रुपये है.
सरकार ने पिछले बजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की परिभाषा का विस्तार किया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कंपनियां एक निश्चित टर्नओवर की सीमा पार करने के बाद अपने लाभ न खो दें… वर्तमान बजट में, निर्यात क्षमता वाले मध्यम स्तर के उद्योगों को समर्थन देने और उन्हें अपने क्षेत्र के चैंपियन के रूप में उभरने में मदद करने के लिए और अधिक उपायों की घोषणा की गई है.
राज्य दोनों तरह की बातें नहीं कर सकते. राज्यों को यह जांचना चाहिए कि क्या विभाज्य पूल (divisible pool) का पूरा शुद्ध राजस्व-अर्थात सकल कर राजस्व से उपकर (cess) और अधिभार (surcharge) को हटाकर, उन्हें प्राप्त हो रहा है या नहीं. सकल कर राजस्व (gross tax revenue) पर चर्चा करने की कोई आवश्यकता नहीं है. केंद्र सरकार उपकर और अधिभार लागू करती है जो संविधान के अनुरूप है. उपकर एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए एकत्र किया जाता है.
कर्ज-जीडीपी अनुपात (debt-to-GDP) कोई नया लक्ष्य नहीं है. राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) के साथ, कर्ज-जीडीपी अनुपात पहले से ही एफआरबीएम (FRBM) अधिनियम के 2018 के संशोधन में एक लक्ष्य के रूप में शामिल है. इसका उल्लेख एफआरबीएम अधिनियम की धारा 4(1) बी के तहत किया गया है.
200 पारंपरिक क्लस्टर (legacy clusters), जो दशकों से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के आधार के रूप में जाने जाते हैं और उत्पादन व निर्यात करते हैं—चाहे वह लुधियाना, जालंधर या कानपुर हो, या बिहार के पास के केंद्र हों, या बंगाल में कहीं भी—हमने स्वेच्छा से प्रस्ताव दिया है कि उन्हें फंड दिया जा सकता है, उन्हें अपग्रेड किया जा सकता है और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा सकते हैं.
कुछ राज्यों को बजट में फंड आवंटित नहीं किए जाने के दावों पर, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 2018-19 और 2020 से 2023 तक इस संवैधानिक संस्था की सिफारिशों को पूरा किया गया है.
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