राजपाल यादव का केस स्टडी सिखाती है कि लोन मैनेजमेंट में चूक कितनी महंगी पड़ सकती है. EMI मिस होने पर पेनल्टी और चक्रवृद्धि ब्याज का बोझ कर्ज को बेकाबू कर देता है, जिससे सिबिल स्कोर खराब होता है और कानूनी कार्रवाई का जोखिम बढ़ता है. स्मार्ट री-पेमेंट प्लान, पार्ट-पेमेंट और बजटिंग के जरिए आप इस वित्तीय जाल से सुरक्षित बाहर निकल सकते हैं.
वैसे तो राजपाल ने अपने किसी परिचित से यह पैसा लिया था लेकिन जो लोग बैंक से भी कर्ज लेते हैं तो भी आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए. जब आप राजपाल यादव के केस की तरह एक भी EMI मिस करते हैं, तो बैंक आपसे केवल उस महीने की किश्त नहीं मांगता, बल्कि उस पर ‘लेट पेमेंट पेनल्टी’ भी लगाता है. असली समस्या तब शुरू होती है जब यह पेनल्टी और बचा हुआ ब्याज आपके मूलधन (Principal Amount) में जोड़ दिया जाता है. अगले महीने से बैंक इस नई और बड़ी राशि पर ब्याज वसूलता है. इसे ‘ब्याज पर ब्याज’ कहा जाता है. कुछ ही महीनों में यह बोझ इतना बढ़ जाता है कि आपकी मासिक आय उसे कवर करने में छोटी पड़ने लगती है और आप राजपाल यादव जैसे ‘ब्याज के बम’ वाले जाल में फंस जाते हैं.
कैसे EMI मिस करना पड़ता है भारी?
लोन की किश्त टूटने पर बैंक सबसे पहले ‘डिफ़ॉल्ट’ की प्रक्रिया शुरू करते हैं. यदि आप राजपाल यादव के मामले को देखें, तो वहां भी लोन की रकम ब्याज और पेनाल्टी के कारण तेजी से बढ़ी थी. जब ब्याज कंपाउंड होता है, तो वह आपके कर्ज को दोगुना करने में देर नहीं लगाता. इसके अलावा, चेक बाउंस होने पर बैंक धारा 138 के तहत आपराधिक मुकदमा भी चला सकते हैं, जो आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूल में मिला सकता है.
क्रेडिट स्कोर (CIBIL) पर पड़ता है गहरा घाव
लोन चुकाने में देरी का सबसे पहला और स्थायी नुकसान आपके क्रेडिट स्कोर पर होता है. सिबिल स्कोर आपकी ‘वित्तीय साख’ की रिपोर्ट है. यदि आप एक भी EMI मिस करते हैं, तो आपका स्कोर तेजी से नीचे गिर सकता है. इसका परिणाम यह होता है कि भविष्य में जब आपको किसी वास्तविक इमरजेंसी के लिए लोन की जरूरत होगी, तो बैंक या तो आपको लोन देने से मना कर देंगे या फिर आपसे बहुत ज्यादा ब्याज दर वसूलेंगे.
कैसे हों लोन फ्री
हाई-इंटरेस्ट लोन को प्राथमिकता: सबसे पहले उन लोन को खत्म करें जिन पर ब्याज दर सबसे ज्यादा है, जैसे क्रेडिट कार्ड बकाया या पर्सनल लोन.
पार्ट-पेमेंट का लाभ: अगर आपके पास बोनस या अन्य माध्यमों से अतिरिक्त पैसा आता है, तो उसे लोन के ‘पार्ट-पेमेंट’ में लगाएं. इससे सीधे आपका मूलधन कम होता है और भविष्य का ब्याज बचता है.
फोरक्लोजर (Foreclosure): यदि आपके पास पर्याप्त रकम है, तो लोन को मैच्योरिटी से पहले बंद करना हमेशा फायदेमंद होता है. हालांकि बैंक इस पर कुछ शुल्क ले सकते हैं, लेकिन यह आपके द्वारा दिए जाने वाले कुल ब्याज से बहुत कम होता है.
सुरक्षित कर्ज प्रबंधन के सूत्र
- अनुशासन: राजपाल यादव का मामला सिखाता है कि कर्ज की किश्त को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए, चाहे आप सेलिब्रिटी हों या आम आदमी.
- पेनल्टी का बोझ: EMI देरी से भरने पर केवल जुर्माना नहीं लगता, बल्कि कानूनी पेचीदगियां भी शुरू हो सकती हैं.
- बजट की महत्ता: सैलरी आते ही सबसे पहले EMI और निवेश की राशि अलग करें, फिजूलखर्ची के लिए बाद में सोचें.
- सावधानी: कभी भी अपनी क्षमता से अधिक का कर्ज न लें, राजपाल यादव के केस में फिल्म निर्माण के लिए लिया गया भारी कर्ज ही मुसीबत की जड़ बना था.
वित्तीय आजादी के लिए सही निर्णय
कर्ज लेना बुरा नहीं है, लेकिन उसे मैनेज न करना बुरा है. राजपाल यादव का मामला वित्तीय इतिहास में एक सबक के तौर पर दर्ज है जो याद दिलाता है कि कानून और बैंकिंग नियम सबके लिए बराबर हैं. अपने मासिक बजट में ‘लोन री-पेमेंट’ को सबसे ऊपर रखें. यदि आप आर्थिक तंगी में हैं, तो बैंक से संपर्क कर लोन रिस्ट्रक्चरिंग की बात करें, लेकिन भुगतान से पीछे न हटें. सही रणनीति आपको ब्याज के बम से बचाएगी और मानसिक शांति प्रदान करेगी.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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