पेट्रोनेट एलएनजी के सीईओ अक्षय कुमार सिंह ने कहा है कि अगर अमेरिका से लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी सही और वाजिब कीमत पर मिलेगी तो भारत उससे खरीद सकता है. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उपभोक्ता गैस का इस्तेमाल तब करेंगे जब उसकी कीमत दूसरे ईंधन से सस्ती होगी. भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक देश है और आने वाले सालों में खपत और बढ़ने वाली है क्योंकि उर्वरक, सिटी गैस, रिफाइनरी और बिजली बनाने वाले सेक्टर्स में मांग तेजी से बढ़ रही है.
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक देश है और आने वाले सालों में खपत और बढ़ने वाली है क्योंकि उर्वरक, सिटी गैस, रिफाइनरी और बिजली बनाने वाले सेक्टर्स में मांग तेजी से बढ़ रही है. अभी भारत मुख्य रूप से कतर और ऑस्ट्रेलिया से एलएनजी खरीदता है.
भारत को क्या फायदा मिलेगा?
आपको बता दें कि पेट्रोनेट कंपनी लंबे समय के समझौते करने की कोशिश कर रही है ताकि सप्लाई सुरक्षित रहे. कंपनी अपने मौजूदा टर्मिनल की क्षमता बढ़ा रही है और पूर्वी तट पर एक नया आयात टर्मिनल भी बना रही है. भारत में अभी करीब 27 हजार मेगावाट की गैस आधारित बिजली बनाने की क्षमता है लेकिन सस्ती गैस न मिलने की वजह से प्लांट सिर्फ एक चौथाई क्षमता पर चल रहे हैं. सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी मौजूदा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत हो जाए. यह बात ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है.
बदले में वाशिंगटन चाहता है कि भारत अमेरिका से होने वाले सालाना आयात को दोगुना से ज्यादा करे. 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच कुल व्यापार 132 अरब डॉलर रहा जिसमें भारत को 41 अरब डॉलर का फायदा हुआ. अक्षय कुमार सिंह ने साफ कहा कि भारत ऊर्जा को सबसे सस्ती कीमत पर लेना चाहता है. कोई नहीं कह रहा कि किसी भी कीमत पर खरीदो. लंबे समझौतों में सिर्फ कीमत ही नहीं बल्कि अगर खरीददार तय मात्रा न उठाए तो जुर्माना जैसे नियम भी होते हैं. भारत बाजार बहुत कीमत के प्रति संवेदनशील है इसलिए शर्तें अच्छी होनी चाहिए.
पेट्रोनेट के सीईओ ने दी ये जानकारी
पेट्रोनेट के सीईओ ने यह भी कहा कि दुनिया में नई एलएनजी बनाने की क्षमता बढ़ रही है जिससे कीमतें स्थिर हो सकती हैं. भारत उपभोक्ताओं के लिए सस्ती गैस चाहता है ताकि बिजली और दूसरे क्षेत्रों में इस्तेमाल बढ़े. अभी गैस महंगी होने से मांग नहीं बढ़ पा रही है. भारत अमेरिका से एलएनजी खरीदने के लिए तैयार है लेकिन कीमत वाजिब होनी चाहिए अन्यथा नहीं. यह फैसला भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने के मकसद से जुड़ा है. पेट्रोनेट जैसी कंपनियां लगातार नए स्रोत तलाश रही हैं ताकि सप्लाई चेन मजबूत बने और देश की बढ़ती जरूरतें पूरी हों. इससे आम जनता को भी फायदा होगा क्योंकि अमेरिका से सस्ती कीमत पर एलएनजी खरीदने से आम जनता को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गैस की कीमतें कम होंगी और इससे रोजमर्रा की जिंदगी आसान बनेगी.
आम आदमी को सीधा फायदा
सबसे पहले बिजली का फायदा होगा. भारत में करीब 27 हजार मेगावाट की गैस आधारित बिजली प्लांट की क्षमता है लेकिन सस्ती गैस न मिलने से ये प्लांट सिर्फ एक चौथाई क्षमता पर चल रहे हैं. सस्ती एलएनजी आने से ये प्लांट ज्यादा चलेंगे जिससे बिजली ज्यादा बनेगी और बिजली के बिल कम हो सकते हैं. घरों में बिजली का खर्च घटेगा तो आम परिवार को हर महीने कुछ पैसे बचेंगे जो छोटी-मोटी जरूरतों में काम आएंगे.
दूसरा बड़ा फायदा उर्वरक यानी खाद पर होगा. खाद बनाने में बहुत गैस लगती है और अगर गैस सस्ती हुई तो खाद की कीमतें भी कम होंगी. किसानों को सस्ती खाद मिलेगी जिससे फसल की लागत घटेगी और सब्जी-फल-अनाज सस्ते हो सकते हैं. बाजार में खाने-पीने की चीजों के दाम थोड़े कम होने से हर घर की रसोई का बजट बचता है और आम आदमी को सीधा फायदा होता है.
तीसरा शहरों में सिटी गैस यानी पाइपलाइन से आने वाली गैस या सीएनजी पर असर पड़ेगा. भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है और आने वाले सालों में उर्वरक, सिटी गैस, रिफाइनरी और बिजली क्षेत्रों में मांग बहुत बढ़ रही है. सस्ती गैस से सिटी गैस के दाम कम हो सकते हैं जिससे घरों में रसोई गैस सस्ती मिलेगी या वाहनों में सीएनजी का इस्तेमाल बढ़ेगा और पेट्रोल-डीजल से सस्ता पड़ेगा. इससे आम लोग जो गाड़ी चलाते हैं या घर में गैस इस्तेमाल करते हैं उन्हें राहत मिलेगी.
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