पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है. कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में कई परिवार यह सोचने लगे हैं कि खाना बनाने के लिए एलपीजी सस्ता है या इंडक्शन चूल्हा.
सिलेंडर महंगा और सप्लाई कम, क्या इंडक्शन चूल्हा बन सकता है सस्ता विकल्प.(Image:AI)
कैसे काम करते हैं दोनों विकल्प
रसोई में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी चूल्हे में गैस जलने से आग पैदा होती है और उसी से बर्तन गर्म होते हैं. इस प्रक्रिया में काफी गर्मी आसपास की हवा में भी निकल जाती है, जिससे ऊर्जा का कुछ हिस्सा बेकार चला जाता है. वहीं इंडक्शन चूल्हा बिजली की मदद से एक चुंबकीय क्षेत्र बनाता है, जिससे बर्तन सीधे गर्म हो जाता है. इस वजह से ऊर्जा का इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी तरीके से होता है और कम ऊर्जा में ज्यादा गर्मी मिलती है.
खर्च में कितना फर्क पड़ता है
एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर में करीब 14.2 किलोग्राम गैस होती है और इसकी कीमत कई शहरों में लगभग 900 से 1100 रुपये तक पहुंच गई है. गैस चूल्हे की कार्यक्षमता लगभग 55 प्रतिशत मानी जाती है, यानी आधी से ज्यादा ऊर्जा इस्तेमाल नहीं हो पाती. दूसरी तरफ घरों में बिजली की कीमत कई राज्यों में 4 से 8 रुपये प्रति यूनिट के बीच होती है. ऐसे में इंडक्शन चूल्हा ज्यादा कुशल माना जाता है और रोज 2 से 3 घंटे खाना बनाने वाले परिवार को महीने में लगभग 180 रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक की बचत हो सकती है.
शोध क्या कहते हैं
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई अध्ययनों में पाया गया है कि बिना सब्सिडी वाला एलपीजी इस्तेमाल करना कई बार बिजली से खाना बनाने की तुलना में ज्यादा महंगा पड़ सकता है. एक अध्ययन के मुताबिक शहरों में रहने वाले एक सामान्य परिवार के लिए साल भर में इलेक्ट्रिक कुकिंग पर करीब 5,800 रुपये का खर्च आता है, जबकि बिना सब्सिडी वाले एलपीजी पर यह खर्च लगभग 8,000 रुपये तक पहुंच सकता है. हालांकि जिन परिवारों को गैस पर सरकारी सब्सिडी मिलती है, उनके लिए एलपीजी अभी भी सस्ता पड़ सकता है.
फिर भी LPG क्यों पसंद करते हैं लोग
हालांकि इंडक्शन चूल्हा कई मामलों में सस्ता साबित हो सकता है, लेकिन इसके कुछ व्यावहारिक सीमित पहलू भी हैं. कई क्षेत्रों में बिजली कटौती होने से इंडक्शन पर खाना बनाना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा भारतीय खाना बनाने की पारंपरिक शैली, जैसे रोटी बनाना, तड़का लगाना या सीधे आंच पर भूनना, गैस चूल्हे पर ज्यादा आसान माना जाता है. यही कारण है कि गैस की कीमत बढ़ने के बावजूद देश के ज्यादातर घरों में एलपीजी अभी भी मुख्य विकल्प बना हुआ है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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