यह आंकड़ा बताता है कि सरकार को कॉरपोरेट टैक्स और पर्सनल इनकम टैक्स दोनों से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है और टैक्स कंप्लायंस में सुधार हुआ है.
कॉरपोरेट टैक्स और पर्सनल टैक्स में कितना कलेक्शन
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के डेटा के मुताबिक 10 फरवरी तक नेट कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 8.89 लाख करोड़ रुपये रहा है. इसमें सालाना आधार पर 14.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं नेट नॉन कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन, जिसमें पर्सनल इनकम टैक्स शामिल है, 10.03 लाख करोड़ रुपये रहा है और इसमें 5.9 प्रतिशत की बढ़त हुई है.
एसटीटी से कितनी कमाई हुई
शेयर बाजार से जुड़े सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स से भी सरकार को अच्छी कमाई हुई है. FY26 में 10 फरवरी तक एसटीटी कलेक्शन 50,279 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 49,201 करोड़ रुपये से 2.2 प्रतिशत ज्यादा है.
रिफंड में तेज गिरावट क्यों आई
FY26 में टैक्स रिफंड 3.34 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल के 4.11 लाख करोड़ रुपये से 18.82 प्रतिशत कम है. टैक्स अधिकारियों का कहना है कि रिफंड में गिरावट किसी सख्ती की वजह से नहीं बल्कि सिस्टम और प्रोसेस बदलाव के कारण है. प्रीफिल्ड डेटा, सिस्टम बेस्ड वेरिफिकेशन और रिटर्न फाइलिंग बिहेवियर में बदलाव से रिफंड जनरेशन पैटर्न बदल गया है.
ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कितना रहा
ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 22.78 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो सालाना आधार पर 4.09 प्रतिशत ज्यादा है. यह आंकड़ा दिखाता है कि सरकार की कुल टैक्स वसूली मजबूत बनी हुई है.
कंप्लायंस नज और अतिरिक्त टैक्स कलेक्शन
सीबीडीटी चेयरमैन रवि अग्रवाल (Ravi Agarwal) ने पहले बताया था कि कंप्लायंस नज कैंपेन से सरकार को अतिरिक्त टैक्स कलेक्शन मिला है. इन कैंपेन से लगभग 9,640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टैक्स प्रभाव पड़ा, जिसमें 8,800 करोड़ रुपये घरेलू मामलों से और 840 करोड़ रुपये विदेशी इनकम और एसेट डिस्क्लोजर से जुड़े थे. इसमें से करीब 1,750 करोड़ रुपये ऐसे टैक्सपेयर्स से आए जिन्होंने रिटर्न संशोधित कर रिफंड क्लेम कम किया.
रिफंड प्रोसेसिंग का स्टेटस
अधिकारियों के मुताबिक FY26 में 95 प्रतिशत से ज्यादा रिफंड केस प्रोसेस हो चुके हैं. रिफंड जारी करना रिटर्न प्रोसेसिंग और डेटा मिसमैच सॉल्व होने की गति पर निर्भर करता है.
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