Gold Demand Down : देश में सोने की कीमत लगातार कम होती जा रही है, लेकिन इसकी खरीदारी बढ़ने के बजाय घट रही है. इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन का कहना है कि ईरान युद्ध ने आम आदमी को जरूरत की चीजों की ओर मोड़ दिया है और शादियों का सीजन होने के बावजूद उनके अंदर सोने-चांदी की खरीदारी को लेकर आकर्षण नहीं दिख रहा है.
सोना सस्ता होने के बावजूद ज्वैलरी की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है.
आईबीजेए के सचिव सुरेंद्र मेहता ने बताया कि देश में सोने की बिक्री पिछले कुछ समय से लगातार कम होती जा रही है. देश के ज्यादातर लोगों में अब सोने की ओर रुझान कम होता दिख रहा है. इसके बजाय वे अपना कैश ईंधन, गैस और अन्य जरूरी सामानों की खरीद के लिए बचाकर रखना चाहते हैं, क्योंकि ईरान संकट की वजह से उनके अंदर आने वाले समय में महंगाई बढ़ने का डर समा रहा है. यही वजह है कि खुदरा हाजिर बाजार में सोने की बिक्री लगातार कम होती जा रही है.
कितना था ईरान संकट से पहले सोने का भाव
ईरान संकट जब शुरू हुआ था, उससे पहली 27 फरवरी को सोने की कीमत 1,59,097 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रही थी. इसके बाद सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल दिखा और 2 मार्च को युद्ध शुरू होने के समय 5.5 फीसदी बढ़कर 1,67,471 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई थी. हालांकि, अब एक बार फिर कीमतों पर दबाव दिख रहा है और यह गिरकर ईरान संकट के पूर्व के समय पर जा पहुंची है, जो फिलहाल 1,58,399 रुपये प्रति 10 ग्राम दिख रही है. मेहता ने बताया कि यह चकित करता है कि सोने की कीमतों में गिरावट के बावजूद इसकी खरीदारी घटती जा रही है.
ज्वैलरी की खरीदारी भी घटी
आईबीजेए ने बताया कि देश में ज्वैलरी की बिक्री भी कम होती जा रही है, क्योंकि एक तो मार्च का महीना होने की वजह से दस्तावेजीकरण बढ़ गया है और दूसरा ईरान संकट ने खुदरा खरीदारों की मंशा को भी बदल दिया है. अब उनका जोर गहनों के बजाय जरूरी सामानों की तरफ ज्यादा दिख रहा है. ज्वैलर्स भी नया सामान खरीदने के बजाय वित्तवर्ष का आखिरी महीना होने की वजह से अपने बहखातों को दुरूस्त करने में लगे हुए हैं.
क्यों गिर रहा सोने का भाव
ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड का भाव 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चला गया है, जिसके जल्द ही 120 डॉलर तक जाने की आशंका जताई जा रही है. चूंकि, कमोडिटी की खरीद-बिक्री डॉलर में होती है और ऐसे समय में डॉलर मजबूत हो रहा है तो सोने पर इसका दबाव साफ देखा जा रहा और निवेशक इस समय कीमती धातुओं की ओर आकर्षित होने के बजाय डॉलर पर दांव लगा रहे हैं. इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरें भी इस माहौल में ऊपर ही बनी रहेंगी, ताकि महंगाई को काबू में रखा जा सके. ज्यादा ब्याज दर की वजह से भी सोने और चांदी की डिमांड पर असर पड़ता है. हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में यह दोबारा 5,200 डॉलर यानी 1.64 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास जा सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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