नौकरी छोड़ने के बाद भी मिलता है ब्याज
बहुत से लोगों को लगता है कि नौकरी छूटते ही EPF पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है. जबकि ऐसा नहीं है. Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) 58 साल की उम्र तक आपके खाते पर ब्याज देता रहता है, भले ही आप कुछ समय तक काम न करें. हाल के वर्षों में EPF पर करीब 8 प्रतिशत से अधिक ब्याज दर दी गई है, जो लंबे समय में बड़ी रकम बना सकती है. अगर आप पैसा निकाल लेते हैं, तो यह ब्याज रुक जाता है और आपका रिटायरमेंट फंड छोटा पड़ सकता है.
कंपाउंडिंग की ताकत को मत तोड़िए
लंबी अवधि में धन बढ़ाने का सबसे बड़ा हथियार है कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज. जब आपके खाते में जमा राशि पर हर साल ब्याज जुड़ता है और फिर उस पर भी ब्याज मिलता है, तो रकम तेजी से बढ़ती है. यदि आप 30 या 35 साल की उम्र में EPF निकाल लेते हैं, तो आप आने वाले 20- 25 साल की ग्रोथ खो देते हैं. यही छोटी दिखने वाली रकम रिटायरमेंट तक पहुंचते-पहुंचते लाखों या करोड़ों में बदल सकती है.
पांच साल का नियम और टैक्स का असर
EPF निकालने से पहले ‘पांच साल’ का नियम जरूर याद रखें. यदि आपने लगातार पांच साल की सेवा पूरी नहीं की है और पूरा पैसा निकाल लेते हैं, तो उस पर टैक्स लग सकता है. इससे आपकी बचत और कम हो जाती है. खासकर करियर की शुरुआती अवस्था में बार-बार नौकरी बदलने वाले युवाओं के लिए यह समझना जरूरी है कि जल्द निकासी टैक्स और ब्याज, दोनों का नुकसान कराती है.
ब्याज न दिखे तो क्या करें?
कभी-कभी EPF खाते में ब्याज अपडेट होने में देरी हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार घबराने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि ब्याज की गणना बाद में जोड़ दी जाती है. यदि लंबे समय तक ब्याज नहीं दिखे, तो आप EPFO पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं या संबंधित कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं. फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि अपने खाते में नाम, जन्मतिथि, बैंक डिटेल और केवाईसी जानकारी अपडेट रखना बेहद जरूरी है, वरना क्लेम में दिक्कत आ सकती है.
पैसा निकालने के बजाय ट्रांसफर है बेहतर विकल्प
अगर आप नई नौकरी जॉइन करते हैं, तो अपने पुराने EPF बैलेंस को नए खाते में ट्रांसफर करना बेहतर है. आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक ही रहता है, जिससे सेवा की निरंतरता बनी रहती है और टैक्स लाभ भी सुरक्षित रहते हैं. हालांकि गंभीर बीमारी, घर खरीदने या बच्चों की पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए आंशिक निकासी की अनुमति है, लेकिन पूरी रकम निकालना समझदारी नहीं मानी जाती. कुल मिलाकर, EPF सिर्फ एक बचत खाता नहीं बल्कि रिटायरमेंट की मजबूत नींव है. थोड़े समय की जरूरत के लिए इसे तोड़ना भविष्य की सुरक्षा से समझौता हो सकता है. समझदारी इसी में है कि धैर्य रखें, ब्याज को बढ़ने दें और अपने बुढ़ापे की आर्थिक आजादी को मजबूत बनाएं.
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