Electricity Subsidy : बिजली की सब्सिडी तो दिल्ली वालों को कई साल से मिल रही है, लेकिन अब सरकार इसकी समीक्षा करने की तैयारी में है. कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि शहर में कई खाते निष्क्रिय हो चुके हैं, फिर भी सरकार को फिक्स्ड चार्ज के रूप में हर साल करीब 60 करोड़ रुपये चुकाने पड़ते हैं. इन पैसों को बचाने के लिए ही सरकार ऐसे निष्क्रिय खातों की सब्सिडी बंद करने की तैयारी में है.
दिल्ली सरकार बिजली सब्सिडी की समीक्षा करके कई खाते बंद करने वाली है.
कैग ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दिल्ली में हजारों ऐसे बिजली उपभोक्ता हैं जो लंबे समय से बाहर रहते हैं या फिर विदेश में बस गए हैं. लेकिन, सब्सिडी योजना के तहत आज भी उनके कनेक्शन के लिए सरकार मिनिमम फीस का भुगतान करती है. भले ही इन उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य आता हो, लेकिन कनेक्शन होने के कारण सरकार को हर महीने 200 रुपये शुल्क का भुगतान करना पड़ता है. ऐसे निष्क्रिय खातों की पहचान कर उसकी सब्सिडी को बंद की जाएगी, ताकि हर साल इस पर खर्च हो रहे सरकार के करोड़ों रुपये बचाए जा सकें.
क्या है दिल्ली की सब्सिडी योजना
दिल्ली में चल रही बिजली सब्सिडी योजना के तहत जिन उपभोक्ताओं का हर महीने खर्च 200 यूनिट से कम रहता है, उनका बिजली बिल शून्य आता है. 200 से 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वालों को सरकार की ओर से 50 फीसदी सब्सिडी (अधिकतम 800 रुपये) दी जाती है, जबकि जिन उपभोक्ताओं का खर्चा हर महीने 400 यूनिट से भी ज्यादा होता है, उन्हें कोई सब्सिडी सरकार की ओर से नहीं दी जाती है. इस सब्सिडी पर सरकार को हर साल करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं.
खाते बंद करने से कितने पैसे बचेंगे
कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ऐसे निष्क्रिय खातों के लिए भी सरकार हर साल 50 से 60 करोड़ रुपये खर्च करती है. अगर ऐसे खातों की सब्सिडी बंद कर दी जाए तो इन पैसों की भी बचत हो सकेगी. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि बिजली सब्सिडी बंद कर दी जाएगी. बस ऐसे खातों का ही भुगतान बंद होगा, जिनके कनेक्शन वाले घरों पर ताले लगे हुए हैं और वहां कोई बिल नहीं आता है. अगर इन घरों में रहने वाले वापस आते हैं और बिजली की खपत शुरू करते हैं तो फिर सब्सिडी को भी वापस शुरू कर दिया जाएगा.
कितने लोगों को मिलती है सब्सिडी
दिल्ली में जुलाई, 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, 62.6 लाख लोगों को सब्सिडी दी जा रही है. इसमें से 83 फीसदी उपभोक्ता घरेलू बिजली कनेक्शन वाले हैं. 2025 में शून्य बिजली बिल वाले उपभोक्ताओं की औसत संख्या हर महीने 29 लाख के आसपास रही है, जो 2024 में 27.3 लाख के आसपास रही थी. इन उपभोक्ताओं का बिल भले ही शून्य आए लेकिन उनके लोड के हिसाब से फिक्स्ड चार्ज देना पड़ता है. 2 किलोवॉट वाले कनेक्शन के लिए 20 रुपये प्रति किलोवॉट हर महीने, 2 से 5 केवी पर 50 रुपये हर महीने, 5 से 15 केवी तक 100 रुपये और 15 केवी से ऊपर 200 रुपये हर महीने चार्ज देना पड़ता है. सरकार इसी चार्ज का बोझ हटाने के लिए सब्सिडी की समीक्षा करने जा रही है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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