डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के 15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ ऐलान के बाद बिटकॉइन की कीमतों में गिरावट देखने को मिली और क्रिप्टो बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई. बिटकॉइन पहले ही अपने ऑल टाइम हाई से करीब 45 प्रतिशत गिर चुका है और निवेशक डिप में खरीदारी से बच रहे हैं. मजबूत डॉलर, मैक्रो इकनॉमिक अनिश्चितता, ETF आउटफ्लो और रिस्क एसेट्स में कमजोरी ने क्रिप्टो पर दबाव बढ़ा दिया है.
ट्रम्प के नए टैरिफ फैसले ने निवेशकों के बीच पॉलिसी अनिश्चितता बढ़ा दी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बाजार को लगा था कि टैरिफ का दौर खत्म हो रहा है और रिस्क एसेट्स में पैसा लौटेगा. लेकिन अचानक नए टैरिफ ने ट्रेड वॉर की आशंका फिर से जगा दी, जिससे निवेशक सतर्क हो गए. टैरिफ बढ़ने पर आमतौर पर डॉलर मजबूत होता है, क्योंकि निवेशक सुरक्षित मुद्रा की ओर भागते हैं. डॉलर मजबूत होने पर बिटकॉइन और गोल्ड जैसी संपत्तियों पर दबाव पड़ता है. इसके अलावा, हाई टैरिफ से महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में कटौती टलने का डर भी लिक्विडिटी को कम कर सकता है, जो क्रिप्टो बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है.
बिटकॉइन ऑल टाइम हाई से 45 प्रतिशत टूटा
बिटकॉइन पहले ही अपने ऑल टाइम हाई से करीब 45 प्रतिशत गिर चुका है और निवेशक इस गिरावट में खरीदारी करने से बच रहे हैं. इसके पीछे कई बड़े कारण हैं.
- पहला कारण मैक्रो इकनॉमिक अनिश्चितता है, जिसमें अमेरिका की ब्याज दर नीति, ग्लोबल टैरिफ और जियो पॉलिटिकल तनाव शामिल हैं.
- दूसरा कारण यह है कि क्रिप्टो बाजार में संस्थागत निवेशकों की खरीदारी कमजोर हुई है, जिससे बड़े सपोर्ट लेवल टूटे हैं.
- तीसरा कारण बिटकॉइन ETF से बढ़ता आउटफ्लो है, जिसने बाजार में सेलिंग प्रेशर बढ़ाया है.
- चौथा कारण रिटेल निवेशकों का घटता भरोसा है, क्योंकि कई निवेशक मान रहे हैं कि अभी और गिरावट आ सकती है.
- पांचवां बड़ा कारण टेक शेयरों और रिस्क एसेट्स में कमजोरी है, जिससे निवेशकों ने क्रिप्टो जैसी जोखिम भरी संपत्तियों से दूरी बना ली है.
आगे क्रिप्टो बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
अल्पकालिक तौर पर बिटकॉइन में भारी उतार चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि ट्रम्प ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में नए और कानूनी टैरिफ तय किए जाएंगे. जब तक ट्रेड पॉलिसी पर स्पष्टता नहीं आती, निवेशक जोखिम से बचने की कोशिश करेंगे और क्रिप्टो बाजार में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है. दीर्घकालिक रूप से कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर टैरिफ की वजह से डॉलर कमजोर होता है या वैश्विक वित्तीय सिस्टम पर दबाव बढ़ता है, तो बिटकॉइन डिजिटल गोल्ड की तरह हेज के रूप में उभर सकता है. सरकारी कर्ज और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ बिटकॉइन को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है.
कानूनी पेच और बाजार की नजर
ट्रम्प अब ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 (Section 122) के तहत टैरिफ लगा रहे हैं, जिसके तहत अधिकतम 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है. बाजार की नजर अब इस पर है कि क्या कांग्रेस या अदालतें इस पर फिर से रोक लगाती हैं. अगर कानूनी लड़ाई बढ़ती है, तो क्रिप्टो बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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