मध्य पूर्व में पिछले चार हफ्तों से ज्यादा समय से इजरायल और अमेरिका का ईरान के साथ युद्ध लगातार जारी है. इस युद्ध के दौरान कई बार फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप पर अमेरिका की तरफ से हमला और कब्जा करने की बात सामने आई है, लेकिन 22 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले इस छोटे से द्वीप की सुरक्षा में ईरान पूरी तरह से लगा हुआ है और ऐसे इसलिए है क्योंकि खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.
करीब 8 किलोमीटर लंबा और 4 से 5 किलोमीटर की चौड़ाई वाला यह द्वीप आकार में भले ही छोटा है, लेकिन इसका ईरान के लिए इसका रणनीतिक और आर्थिक महत्व काफी बड़ा है, क्योंकि यह छोटा सा द्वीप ईरान के तेल के खजाने का मुख्य द्वार है. इस अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप की विशेषता को देखते हुए प्रसिद्ध ईरानी लेखक जलाल अल-ए-अहमद ने 1960 के दशक में इसे फारस की खाड़ी का एक अनाथ मोती कहा था.
ईरान के लिए क्या है खार्ग द्वीप का महत्व?
खार्ग द्वीप ईरान के बुशेहर पोर्ट से करीब 55 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है, जबकि यह देश की मुख्यभूमि से करीब 15 नॉटिकल मील (लगभग 28 किमी) दूर है. अगर ईरान के लिए इस द्वीप के महत्व की बात करें तो यह बेहद असाधारण है. यह द्वीप देश के कुल तेल निर्यात का करीब 90 प्रतिशत प्रोसेस करता है और हर साल करीब 950 मिलियन यानी 95 करोड़ बैरल तेल का संचालन करता है. यह द्वीप ईरान के ऑयल फील्ड्स और वैश्विक बाजारों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है. इसी कारण से इसे ईरान की आर्थिक जीवनरेखा यानी इकोनॉमिक लाइफलाइन और क्राउन ज्वेल भी कहा जाता है.
खार्ग द्वीप के तेल से ईरान की सालाना कितनी होती है कमाई?
खार्ग द्वीप से कच्चे तेल का होने वाला निर्यात ईरान की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती देती है. जानकारी के मुताबिक, खार्ग द्वीप से ईरान को हर साल लगभग 78 बिलियन डॉलर (करीब 7.38 लाख करोड़ रुपये) का राजस्व प्राप्त होता है. वहीं, साल 2025 में ईरान ने वैश्विक बाजार में तेल निर्यात से करीब 53 बिलियन डॉलर (करीब 5 लाख करोड़ रुपये) की कमाई की, जो उसकी सालाना GDP का लगभग 11 प्रतिशत है. ईरान के खार्ग द्वीप से कच्चे तेल के निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन को जाता है, जो पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल का एक प्रमुख खरीदार बना हुआ है.
खार्ग द्वीप पर हमले से ईरान को कितना होगा नुकसान?
अगर खार्ग द्वीप पर हमला होता है और इसके एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचता है तो इससे ईरान का करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात ठप हो सकता है और इसका असर न सिर्फ ईरान तक ही सीमित रहेगा, बल्कि इससे वैश्विक तेज बाजार में भी बड़ी उथल-पुथल हो सकती है.
क्या पहले कभी खार्ग द्वीप पर हुआ है हमला?
ईरान का खार्ग द्वीप पहले भी क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान निशाना बनाया जा चुका है. 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान इराकी सेना ने इस द्वीप पर कई बार बमबारी की थी. इन हमलों में ईरान के कच्चे तेल के एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान हुआ था.
ईरान ने खार्ग द्वीप को मजबूत सुरक्षा से किया लैस
ईरान ने इन्हीं खतरों के देखते हुए खार्ग द्वीप को मजबूत सुरक्षा से लैस किया है. इसमें एयर डिफेंस सिस्टम्स की तैनाती, मजबूत संरचनाएं और अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक्स शामिल हैं. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि लगातार सैन्य हमलों के बावजूद भी यहां से ईरान के तेल निर्यात जारी रह सके.
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