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बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी ने निर्देशक जोया अख्तर की तारीफ करते हुए कहा है कि उन्होंने फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ में कैटरीना कैफ का बेहद सम्मानजनक और संवेदनशील ढंग से चित्रण किया, खासकर उस सीन में जब कैटरीना के किरदार को पानी से बाहर निकलते हुए और बिकिनी पहनकर दिखाया गया था। शबाना ने स्पष्ट किया कि जोया ने कैमरा का उपयोग जिस तरह किया, उससे कैटरीना के शरीर को वस्तु के रूप में नहीं दर्शाया गया, बल्कि उन्हें एक कार्यशील और स्वतंत्र महिला की तरह पेश किया गया।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक शबाना ने बताया कि फिल्मों में महिलाओं के ऑब्जेक्टिफिकेशन का मुद्दा उन्हें हमेशा से परेशान करता रहा है। उनका कहना है कि कैमरे का अन्दाज तय करता है कि निर्देशक की दिलचस्पी क्या है? यदि कैमरा सीधे अंगों पर फोकस करता है तो वह ऑब्जेक्टिफिकेशन है, लेकिन जोया ने कैमरे को लम्बे शॉट में इस्तेमाल किया और सीधी चाल से बायें पैर से चेहरे की तरफ जूम नहीं किया, जिससे एक महिला को सिर्फ आकर्षक दिखाने का लक्ष्य नहीं रहा।

शबाना ने यह भी कहा कि बॉलीवुड में आइटम नंबर और कई ऐसे सीन होते हैं जहां महिलाओं को सिर्फ आकर्षण के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो कि कई बार फिल्म की कहानी में कोई जरूरी हिस्से नहीं होते। वे कहती हैं कि ऐसे सीन समाज में गलत संदेश पहुंचाते हैं और इसका असर छोटे बच्चों पर भी पड़ता है जब वे इन गानों को नाटक या कार्यक्रमों में गाते हैं और उनके आसपास के लोग इसे मजाक समझकर प्रोत्साहित करते हैं।

जोया अख्तर की यह फिल्म 2011 में आई थी और इसमें कैटरीना कैफ की भूमिका एक डाइविंग प्रशिक्षक की है। शबाना ने जोया की उस संवेदनशीलता और फिल्म बनाने के दृष्टिकोण की तारीफ की, जिससे महिलाओं को सिर्फ एक शोपीस की तरह नहीं दिखाया गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जोया ने उस बिकिनी सीन में कैमरा को सिर्फ भावनात्मक जरूरत और कहानी के अनुसार रखा, जिससे कैटरीना का किरदार सशक्त और आत्म-विश्वासी दिखता है न कि केवल एक लिंगीय नजर का विषय।
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