अगर आप लौहनगरी में हैं तो मानगो बस स्टैंड के पास स्थित ‘साहू जी होटल’ का मटन चखना एक रस्म जैसा है. पिछले 35 वर्षों से तीन पीढ़ियों की विरासत को संभाल रहे राहुल जी आज भी उसी ‘घरेलू’ स्वाद को जिंदा रखे हुए हैं. जो उनके दादाजी ने शुरू किया था. यहां मटन बनाने का तरीका किसी कला से कम नहीं है. इसकी खास रेसिपी में धीमी आंच का कमाल है. मटन को गैस पर नहीं, बल्कि कोयले की धीमी आंच पर बड़े बर्तनों में घंटों तक पकाया जाता है. यहां की ग्रेवी का असली राज मटन कीमा है. ग्रेवी में कीमे का इस्तेमाल इसके स्वाद को दोगुना और गाढ़ा बना देता है. बाजारी मसालों के बजाय, यहां वही मसाले उपयोग होते हैं जो हमारे घरों में मिलते हैं, जिससे पेट पर भारीपन नहीं होता. मात्र ₹150 में दो पीस और ₹300 में चार पीस की थाली यहां के मटन प्रेमियों की पहली पसंद है. आलम यह है कि वीकेंड पर यहां 50 किलो से ज्यादा मटन की खपत हो जाती है. अगर आप कुछ असली और देसी स्वाद ढूंढ रहे हैं, तो साहू जी का यह मटन आपकी तलाश खत्म कर देगा.
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