ISRO Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष विभाग के लिए 13 हजार 705 करोड़ रुपये का बजट दिया, जो पिछले साल के 12,448.60 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस बार बजट का एक बड़ा हिस्सा स्पेस टेक्नोलॉजी पर खर्च होने वाला है, जो रॉकेट, सेटेलाइट और मिशन के लिए खास है।
स्पेस टेक्नोलॉजी पर सरकार का फोकस
सरकार भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने पर काफी ध्यान दे रही है, ताकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) नए रॉकेट और अंतरिक्ष स्टेशन बनाने व मानव अंतरिक्ष उड़ान के सपने को पूरा कर सके। बजट का एक बड़ा हिस्सा स्पेस टेक्नोलॉजी के लिए निर्धारित किया गया है, जिसमें प्रक्षेपण यान, सेटेलाइट और मिशन सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
अंतरिक्ष विभाग के बजट में इस बार कुछ बदलाव किए गए हैं। स्पेस एप्लिकेशंस के लिए बजट बढ़कर 10,397 करोड़ रुपये हो गया है, जो पहले 9,601 करोड़ रुपये था। स्पेस साइंस के लिए भी बजट 184 करोड़ रुपये से बढ़कर 569 करोड़ रुपये हो गया है, लेकिन INSAT सैटेलाइट सिस्टम के बजट में कमी आई है, जो 205 करोड़ रुपये से घटकर 130 करोड़ रुपये हो गया है।
बजट में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के लिए बजट 1,030 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,403 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस बजट का उपयोग इसरो के प्रमुख केंद्रों जैसे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, द्रव प्रणोदन प्रणाली केंद्र, इसरो प्रणोदन परिसर और यूआर राव उपग्रह केंद्र की गतिविधियों में किया जाएगा।
लॉन्च व्हीकल और उपग्रह परियोजनाओं के लिए बजट
इस बजट आवंटन से लॉन्च व्हीकल और उपग्रह परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा, जिसमें रॉकेट (लॉन्च वाहन) परियोजनाएं और उपग्रह परियोजनाएं शामिल हैं। कुल बजट में से 7,329.70 करोड़ रुपये सामान्य खर्च के लिए और 6,375.90 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए रखे गए हैं, जो पिछले साल की संशोधित पूंजी योजना से लगभग 1,066 करोड़ रुपये ज्यादा हैं।
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