- पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ एक महीने के युद्ध के बाद शांति की बातचीत।
- ईरान युद्ध से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में बाधा बनी हुई है।
- इजरायल की जनता प्रधानमंत्री नेतन्याहू के युद्ध जीत के दावों से नाखुश।
- नेतृत्व और युद्ध के परिणामों पर इजरायल में राजनीतिक मतभेद बढ़ रहे हैं।
Israel Iran War: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल एक महीने से ज्यादा समय तक चले युद्ध, संघर्ष और तनाव में फंसे रहे. अमेरिका और इजरायल दोनों एक पक्ष में ईरान के विरुद्ध आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों को अंजाम दे रहे थे, लेकिन हाल ही में दोनों पक्ष युद्ध के अंत और शांति की स्थापना के लिए पाकिस्तान की मेजबानी में बातचीत की मेज पर एक साथ बैठकर चर्चा करने के लिए राजी हुए हैं.
ईरान युद्ध से वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल
ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी तनाव की खत्म होने और वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल के स्थिर होने की संभावनाएं जताई जा रही है, लेकिन इस युद्ध के खत्म होने की चर्चा के बीच इजरायल के निवासियों में इस युद्ध के नतीजे को लेकर गहरी नाराजगी है. इजरायली नागरिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस दावे को मानने को तैयार नहीं हैं कि जिसमें यह कहा जा रहा है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत हासिल की है.
ईरान युद्ध के अब तक के नतीजों से इजरायली जनता नाखुश
28 फरवरी, 2026 से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ यह युद्ध इन तीन देशों के अलावा पूरी दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति में बाधा बन रहा था, जो अभी भी कायम है, लेकिन इस बीच अमेरिका और इजरायल दोनों ईरान पर अपनी जीत हासिल करने के दावे लगातार करते आ रहे हैं. इस बीच इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अपने ही देश में उठ रहे एक राजनीतिक तूफान के बीच में फंस गए हैं. दरअसल, एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि लगभग इजरायल के आधे नागरिक इस बात को नहीं मानते हैं कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध को जीता है.
नेतन्याहू के नेतृत्व और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
जेरूशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में बात सामने आई है कि इजरायल की जनता इस युद्ध के नतीजे से नाखुश है और देश में राजनीतिक हलका बुरी तरह से विभाजित हो गया है, जबकि शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जनता का मजबूत विश्वास हासिल है, लेकिन ईरान युद्ध में इजरायल का नेतृत्व करने वाले पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की जवाबदेही और युद्ध की वास्तविक सच्चाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
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