ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीदना काफी आसान डिसीजन होता है, इसमें आप प्लान को कम्पेयर कर सकते हैं, ऐसा प्लान ले सकते हैं जो आपके लिए फिट हो, वो भी केवल कुछ ही स्टेप्स में. लेकिन कई लोगों के लिए ये एक्सपीरियंस मुसीबत भरा हो जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इंश्योरेंस पोर्टल्स अपनी वेबसाइट पर डार्क पैटर्न्स का इस्तोमाल करते हैं, ये ऐसी तरकीबें होती हैं जिससे ग्राहों को गुमराह किया जा सकता है. अब हाल ही में IRDAI ने बीमा कंपनियों की इस धोखाधड़ी का खेल खत्म करने की तरकीब निकाली है.
दरअसल भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा कंपनियों और एग्रीगेटर्स को निर्देश दिया है कि वो 15 दिनों के भीतर डार्क पैटर्न्स की पहचान करें और उन्हें खत्म करें. IRDAI ने बीमा कंपनियों को सख्ती से निर्देशित किया है कि, वो ये सुनिश्चित करें कि उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद यूजर इंटरफेस को 15 दिनों के भीतर CCPA के दिशानिर्देशों का पालन करें, और एक महीने के अंदर ही इन्हें हटाने की प्लानिं करें और जमा करें.
क्या हैं ‘डार्क पैटर्न’?
‘डार्क पैटर्न्स’ एप्स और वेबसाइट्स पर इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे डिजाइंस होते हैं जो यूजर्स को गुमराह करने का काम करते हैं. ये डिजाइंस यूजर्स से वो काम भी करवा देते हैं जिन्हें सोच- समझकर आराम से किया जाना चाहिए. इंश्योरेंस पोर्टल्स में ये पैटर्न्स ऐसे होते हैं जैसे ऑटो-रिन्यूअल को कैंसल करना मुश्किल बनाना, शुरू में कम कीमतें दिखाना, फिर छिपे हुए खर्च जोड़ देना. यूजर्स पर कॉल, ईमेल या नोटिफिकेशन की बौछार करना यूजर्स को जरूरत से ज्यादा पर्सनल डाटा शेयर करने के लिए मजबूर करना. इसी के चलते कई यूजर्स फंस जाते हैं और गलती से ही कोई ऐसी पॉलिसी खरीद लेते हैं जो उन्हें नहीं खरीदना होती है.
IRDAI की पहल से होंगे ये फायदे
IRDAI की इस कार्रवाई से इंश्योरें सेक्टर में होने वाली मिसलीडिंग से की जाने वाल बिक्री को रोका जा सकेगा. ये कार्रवाई यूजर्स के लिए फायदेमंद है, इससे वो इंश्योरेंस खरीदने के बाद ठगा हुआ सा महसूस नहीं करेंगे. ना ही गलत जानकारी के चलते कोई भी बीमा खरीदने के बाद पछतावा करेंगे. इस नए नियम के बाद से इंश्योरेंस कंपनियों की इस धोखाधड़ी पर रोक लगेगी.
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