Dry Fruit Import Export: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक व्यापार की कमर तोड़ दी है. इस अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का सबसे सीधा और घातक असर अब भारतीय व्यापारियों पर देखने को मिल रहा है. ड्राईफ्रूट के आयात-निर्यात से जुड़े बड़े कारोबारी इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं एक तरफ करोड़ों रुपये का माल समुद्र के बीच फंसा है तो दूसरी तरफ बैंक और कर्जदारों का दबाव बढ़ता जा रहा है.
पशुपति इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक तिवारी ने ‘ABP न्यूज़’ से बातचीत में अपनी आपबीती साझा की. तिवारी ने बताया कि उनका संस्थान हर महीने लगभग 15 से 20 करोड़ रुपये मूल्य के ड्राईफ्रूट्स का कारोबार करता है. इसमें मुख्य रूप से ईरान और खाड़ी देशों से आने वाले उच्च गुणवत्ता के खजूर, अंजीर, पिस्ता, बादाम और सूखे खजूर (छुआरे) शामिल हैं. युद्ध शुरू होने से ठीक पहले उन्होंने बड़ी खेप का ऑर्डर दिया था, जो अब अधर में लटक गया है.
व्यापारिक रूट में बाधा और कंटेनर संकट की स्थिति
व्यापारिक रूट की जानकारी देते हुए अशोक तिवारी ने बताया कि गल्फ देशों से सारा माल कंटेनर के जरिए भारत आता है. लेकिन युद्ध की स्थिति के कारण सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया गया है. इस रुकावट की वजह से उनके ड्रायफ्रूट से भरे 40-45 कंटेनर इस वक्त ईरान के ‘बंदर अब्बास’ पोर्ट और यूएई (UAE) के ‘जबल अली’ पोर्ट पर फंसे हुए हैं. स्थिति यह है कि न तो माल आगे बढ़ पा रहा है और कब बढ़ेगा इसके संकेत मिल पा रहे हैं.
ड्राईफ्रूट व्यापार की आर्थिक चक्र प्रणाली पर असर
ड्राईफ्रूट व्यापार की जटिलताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “हम करोड़ों का ऑर्डर देने के लिए अपनी जमापूंजी, साथी व्यापारियों से लिया गया उधार और बैंक लोन का इस्तेमाल करते हैं. यह एक रोलिंग साइकिल (चक्र) होता है जो हर महीने चलता है. लेकिन माल न पहुंचने की वजह से यह चक्र पूरी तरह टूट गया है. अब हालत यह है कि जिन व्यापारियों से पैसा लिया था, वे तगादा कर रहे हैं और बैंक भी अपनी किश्त मांग रहे हैं.”
व्यापारियों की अपील और बाजार में कीमतों में उछाल की आशंका
अशोक तिवारी दुबई, सऊदी अरब, ईरान और अफगानिस्तान जैसे देशों से माल मंगाकर न केवल नवी मुंबई की APMC मार्केट में बेचते हैं, बल्कि पूरे भारत में इसकी सप्लाई करते हैं. उन्होंने सरकार से मार्मिक अपील करते हुए कहा “मार्केट में मेरी तरह कई व्यापारियों की हालत खराब है. हमारा पैसा माल में फंसा है और ऊपर से ब्याज बढ़ रहा है. मेरी सरकार से विनती है कि इस संकट की घड़ी में हमें बैंक के कर्ज चुकाने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि हमे कुछ मदद मिल सके.”
वर्तमान में ड्राईफ्रूट मार्केट में इस अनिश्चितता की वजह से आने वाले दिनों में कीमतों में भारी उछाल आने की भी आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा.
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