मिडिल ईस्ट में युद्ध चल रहा है. इस बीच यूनाइटेड स्टेट सेंट्रल कमांड ने मंगलवार (17 मार्च 2026) को जानकारी दी कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल करने की कोशिश में बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय इलाकों में मिसाइल ठिकानों पर भारी बमों से हमला किया है. अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन ठिकानों पर तैनात ईरानी एंटी-शिप मिसाइल इस पानी के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा बन रही थीं, इसलिए इन पर कार्रवाई की गई.
AP की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी हमले में डीप पेनिट्रेटर यानी बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया गया. ये बहुत भारी बम होते हैं, जो जमीन के अंदर छिपे मजबूत ठिकानों को भी तबाह कर सकते हैं. इस युद्ध के दौरान ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल कर लिया था, जिससे जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी. इसका असर दुनियाभर में तेल और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ा और दाम तेजी से बढ़ गए. इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों से मदद मांगी थी, लेकिन NATO के कुछ देशों जैसे ब्रिटेन और स्पेन ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया. वे इस युद्ध को और बड़ा नहीं करना चाहते थे.
Hours ago, U.S. forces successfully employed multiple 5,000-pound deep penetrator munitions on hardened Iranian missile sites along Iran’s coastline near the Strait of Hormuz. The Iranian anti-ship cruise missiles in these sites posed a risk to international shipping in the… pic.twitter.com/hgCSFH0cqO
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 17, 2026
बंकर बस्टर बम क्या होते हैं?
ये ऐसे खास बम होते हैं जो जमीन के अंदर बने मजबूत ठिकानों को निशाना बनाते हैं. अमेरिकी वायुसेना ने 2021 में ऐसे बम का सफल परीक्षण किया था, जिसे GBU-72/B कहा जाता है. इसका इस्तेमाल दुश्मन के छिपे सैन्य ठिकानों को खत्म करने के लिए किया जाता है. वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसी के अनुसार, यह 30,000 पाउंड कैटेगरी का हथियार है जिसमें 5,000 पाउंड का वारहेड लगा है.
ईरान युद्ध को लेकर विवाद
इससे पहले भी अमेरिका ने जून 2025 में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के दौरान ईरान के परमाणु ठिकानों जैसे फोर्डो यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट, नतान्ज़ परमाणु सुविधा और इस्फ़हान परमाणु टेक्नोलॉजिकल सेंटर को निशाना बनाया था. इस बीच अमेरिका के अंदर भी मौजूदा कार्रवाई को लेकर मतभेद सामने आए हैं. जहां नेशनल एंटी टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि वे इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते.
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