मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान पर अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं के बीच तेहरान ने परमाणु समझौते को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है. ईरानी राजनयिक ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ एक ऐसे परमाणु डील की दिशा में बातचीत कर रहा है, जो दोनों पक्षों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी होगा. विदेश मंत्रालय के आर्थिक कूटनीति के डिप्टी डायरेक्टर हामिद घनबरी ने कहा कि यह डील लंबे समय तक लागू रहे इसके लिए जरूरी है कि अमेरिका को भी उन क्षेत्रों में फायदा हो, जिससे उसे ज्यादा लाभ मिले.
वार्ता में विमान और ऊर्जा जैसे मुद्दों की एंट्री
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, घनबरी ने कहा कि तेल और गैस क्षेत्रों में साझा हित, खनन निवेश और यहां तक कि विमान खरीद भी अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल हैं. हालांकि ईरान के सुलह भरे रुख के साथ दोनों देशों के बीच तनाव में थोड़ी कमी आई, लेकिन ईरान के निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी ने तेहरान में सत्ता की वापसी की मांग करते हुए दुनिया के प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों का आह्वान किया. म्यूनिख में करीब 250,000 लोगों ने पहलवी की ओर से सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के नेतृत्व वाली ईरान की सरकार के खिलाफ की गई अपील के जवाब में विरोध प्रदर्शन किया.
ईरान-अमेरिका तनाव पर टॉप प्वाइंट्स
1. ईरान के राजनयिक घनबरी के अनुसार तेल और गैस क्षेत्रों, खनन निवेश और यहां तक कि विमान खरीद में साझा हित दोनों देशों की बातचीत में शामिल है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल पावर के साथ 2015 के परमाणु समझौते ने अमेरिका के आर्थिक हितों की रक्षा नहीं की है.
2. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर सहित अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को जिनेवा में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेगा. इससे पहले ओमान में दोनों देशों के प्रतिनिधि एक साथ टेबल पर बात करने के लिए पहुंचे थे.
3. ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने अमेरिका के सामने शर्त रखी है. उन्होंने कहा कि तेहरान संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ परमाणु समझौते के लिए तैयार हो जाएगा, अगर वशिंगटन ईरान पर से प्रतिबंध हटाने पर चर्चा करने को तैयार हो. अब गेंद अमेरिका के पाले में है. उन्हें ये साबित करना है कि वे डील करना चाहते हैं या नहीं. अगर वे इसे लेकर गंभीर हैं तो मुझे यकीन है कि हम समझौते की ओर बढ़ेंगे.’
4. न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार शनिवार (14 फरवरी 2026) को म्यूनिख में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 250,000 लोगों की भारी भीड़ उमड़ी. रैली में लोग ढोल बजाते और सत्ता परिवर्तन के नारे लगाते नजर आए. भीड़ ने ‘बदलाव, बदलाव, सत्ता परिवर्तन’ जैसे नारे लगाए और शेर-सूर्य के प्रतीक चिन्हों वाले हरे-सफेद-लाल झंडे लहराए. यह झंडा ईरान की ओर से 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले इस्तेमाल किया जाता था.
5. रजा पहलवी ने ईरान में चल रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर ईरानियों के समर्थन में आयोजित विशाल रैली को ‘वैश्विक कार्रवाई दिवस का नाम दिया.
6. दुनियाभर के लोकतांत्रिक देशों से समर्थन की अपील करते हुए पहलवी ने चेतावनी दी कि अगर लोकतांत्रिक देश चुपचाप देखते रहे तो ईरान में और भी मौतें होंगी. उन्होंने कहा, ‘हम इस संकट की घड़ी में इकट्ठा हुए हैं और यह पूछने आए हैं कि क्या दुनिया ईरान के लोगों के साथ खड़ी होगी?’ उन्होंने आगे कहा कि ईरान की सरकार का अस्तित्व हर तानाशाह को एक स्पष्ट संदेश देता है कि लोगों को मार डालो और तुम सत्ता में बने रहोगे.’
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