मध्य पूर्व में जारी युद्ध के असर अब भारत में भी दिखाई देने लगे हैं। देश में रसोई गैस की मांग अचानक तेजी से बढ़ी है और लोग सामान्य से कहीं ज्यादा सिलेंडर बुक करा रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह स्थिति घबराहट के कारण बनी है और वास्तविक कमी जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले देश में रोजाना औसतन करीब 55 लाख गैस सिलेंडर बुक होते थे। लेकिन हाल के दिनों में यह संख्या बढ़कर लगभग 75 लाख से ज्यादा प्रतिदिन तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से लोगों की घबराहट में की जा रही अतिरिक्त बुकिंग को दर्शाती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से सिलेंडर बुक कराने से बचें। उनके मुताबिक देश में रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है।
गौरतलब है कि सरकार ने घरेलू स्तर पर रसोई गैस के उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। बताया जा रहा है कि अभी देश में तैयार होने वाली पूरी गैस घरेलू उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध कराई जा रही है ताकि किसी तरह की परेशानी न हो।
बता दें कि भारत अपनी रसोई गैस की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार पहले देश की करीब साठ प्रतिशत जरूरत आयात के जरिए पूरी होती थी। इसमें भी लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति फारस की खाड़ी से होकर गुजरने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती रही है।
लेकिन हाल में क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण यह समुद्री रास्ता काफी हद तक प्रभावित हुआ है। यह संकरा समुद्री मार्ग खाड़ी क्षेत्र को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के तेल तथा गैस परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद कई टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
इसी स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही गैस की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए एक विशेष समिति भी बनाई गई है, जो स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों पर भी विचार कर रही है।
सरकार का कहना है कि कच्चे तेल को लेकर भी फिलहाल चिंता की कोई बड़ी वजह नहीं है। अधिकारियों के अनुसार भारत अब करीब चालीस देशों से कच्चा तेल मंगाता है और देश में आने वाली आपूर्ति दैनिक जरूरत से अधिक बताई जा रही है।
वहीं दूसरी ओर ईरान ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें यह कहा जा रहा था कि उसने भारत के झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है। ईरान की ओर से कहा गया है कि ऐसी खबरों में सच्चाई नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार का दावा है कि देश में रसोई गैस और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर घबराने जैसी स्थिति नहीं बनी है।
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