IPL Cheerleaders Salary 2026 | Image:
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लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चिलचिलाती धूप और शोर के बीच घंटों डांस करने वाली इन प्रोफेशनल्स को आखिर कितनी सैलरी मिलती है? क्या उनका सेलेक्शन कैसे होता है? आइए जानते हैं IPL के इस ‘ग्लैमर’ की पूरी कहानी।
हर फ्रेंचाइजी के लिए अलग प्राइस
दरअसल, IPL में चीयरलीडर्स की कोई एक तय सैलरी नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि वे किस टीम के साथ जुड़ी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और पिछले सीजनों के आंकड़ों को देखें तो शाहरुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) इस मामले में सबसे आगे रहती है। KKR अपनी चीयरलीडर्स को हर मैच के लिए लगभग 24,000 से 25,000 रुपये तक देती है।
वहीं, मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) जैसी बड़ी टीमें अपने चीयर स्क्वॉड को प्रति मैच करीब 20,000 रुपये का भुगतान करती हैं। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की बात करें तो वहां यह राशि 17,000 रुपये के आसपास होती है, जबकि पंजाब किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स जैसी टीमें 12,000 से 15,000 रुपये के बीच मैच फीस देती हैं।
मैच फीस के अलावा मिलने वाले बोनस
चीयरलीडर्स की असली कमाई सिर्फ मैच फीस तक ही सीमित नहीं है। अगर उनकी टीम मैदान पर जीत दर्ज करती है, तो कई फ्रेंचाइजी उन्हें 3,000 रुपये तक का ‘विनिंग बोनस’ भी देती हैं। इसके अलावा, IPL सीजन के दौरान होने वाली कॉर्पोरेट पार्टियों, स्पॉन्सर इवेंट्स और फोटोशूट्स से भी उनकी अतिरिक्त कमाई होती है। इन इवेंट्स के लिए उन्हें प्रति सेशन 5,000 से 12,000 रुपये तक अलग से मिलते हैं।
सबसे दिलचस्प है कि इन प्रोफेशनल्स का निजी खर्च लगभग जीरो होता है। टीमें उनके रहने के लिए फाइव स्टार होटल, हवाई यात्रा का टिकट, खाना-पीना और मेडिकल इंश्योरेंस का पूरा खर्च खुद उठाती हैं। इस तरह एक सीजन में एक चीयरलीडर आसानी से 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक कमा लेती हैं।
कैसे होता है इनका सिलेक्शन?
IPL के मंच पर परफॉर्म करना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए एक बहुत ही कड़ी चयन प्रक्रिया होती है। ज्यादातर चीयरलीडर्स रूस, यूक्रेन, ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों से आती हैं, क्योंकि वहां चीयरलीडिंग को एक प्रोफेशनल करियर के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, अब भारतीय कलाकारों का भी रुझान इस तरफ बढ़ा है।
सिलेक्शन के लिए सबसे पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन ऑडिशन होते हैं, जहां उनके डांस मूव्स के साथ-साथ उनकी एनर्जी, स्टैमिना और कॉन्फिडेंस को परखा जाता है। चूंकि उन्हें हजारों-लाखों की भीड़ के सामने परफॉर्म करना होता है, इसलिए उनकी कम्युनिकेशन स्किल्स और भीड़ को संभालने की क्षमता भी देखी जाती है। टीमें सीधे इनका चुनाव नहीं करतीं, बल्कि इसके लिए बड़ी-बड़ी प्रोफेशनल एजेंसियों की मदद लेती हैं।
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