Dollar vs Rupee: अमेरिका के साथ ट्रेड डील और यूरोपीय संघ-ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर के बावजूद रुपये में मजबूती नहीं दिख रही है. हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को इंटर बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया शुरुआती कारोबार में एक पैसा टूटकर 90.67 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. इससे पहले यह 90.63 पर मजबूत खुला था, लेकिन जल्द ही दबाव में आ गया. पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भी रुपया सीमित दायरे में कारोबार करते हुए 90.66 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
क्यों टूट रहा रुपया?
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती रुपये पर दबाव बना रही है. छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.02 प्रतिशत बढ़कर 96.93 पर रहा, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर असर पड़ा. कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी भी रुपये के लिए नकारात्मक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 67.78 डॉलर प्रति बैरल पर रहा.
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति अवकाश (यूएस प्रेसिडेंशियल हॉलिडे) के कारण कैश डिमांड कम है, लेकिन बाजार की नजर 16 फरवरी को जारी होने वाले व्यापार संतुलन के आंकड़ों पर रहेगी. वहीं शेयर बाजार में भी कमजोरी दिखी. सेंसेक्स 82,555 के आसपास और निफ्टी 25,459 पर फिसल गया. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को 7,395 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव आया.
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट
इसके अलावा, Reserve Bank of India द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 6 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.711 अरब डॉलर घटकर 717.064 अरब डॉलर रह गया. भंडार में गिरावट भी बाजार भावनाओं को प्रभावित कर रही है. कुल मिलाकर, मजबूत डॉलर, एफआईआई की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतें और घटता विदेशी मुद्रा भंडार ये सभी कारक मिलकर रुपये को दबाव में रखे हुए हैं.
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