तेल की हर डील में उसी का सिक्का चलता है। लेकिन अब भारत ने आकर यह कह दिया है कि बस हो गया। हमारा पेट्रोल रुपया आ गया है। क्या भारत रूस की तेल खरीद में गिरावट को यह पेट्रोल रुपया रोक सकता है? क्या सच में भारत ने इसे ल्च कर दिया है? या यह सिर्फ कोई पॉलिसी है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सच में अमेरिकी डॉलर की मोनोपोली तोड़ देगी? दरअसल नाम से ही पता चलता है ना कि पेट्रो यानी कि तेल रुपया यानी हमारा अपना पैसा। भारत ने अब तेल की डील्स में डॉलर को साइडलाइन कर दिया है। जी हां, आप सही सुन रहे हैं। पेट्रो रूपी या पेट्रोल रुपया कोई अलग से ल्च होने वाली करेंसी नहीं है ना ही कोई क्रिप्टो है बल्कि यह एक व्यवस्था या मॉडल है जिसमें भारत तेल यानी क्रूड ऑयल के इंपोर्ट पेमेंट्स रुपए में करता है बजाय अमेरिकी डॉलर के।
इसे भी पढ़ें: Indian Rupee Fall | लड़खड़ाता रुपया, कराहता बाजार! डॉलर की ‘धौंस’ के आगे बेबस हुई भारतीय मुद्रा, 90.96 के स्तर पर पहुंचा पारा
यह पेट्रो डॉलर सिस्टम को चैलेंज करने की कोशिश है। जहां दुनिया का ज्यादातर तेल डॉलर में बिकता है। रूस से हो, यूएसए से हो या ब्राजील से तेल खरीदो, पेमेंट रुपए में करो और ऊपर से आरबीआई की वो स्मार्ट रिसाइक्लिंग स्ट्रेटजी जो रुपए को बाहर भेजती है और वापस लाकर इकॉनमी में डाल देती है। जैसे कोई जादूगर अपना सिक्का फेंके और वापस जेब में आ जाए। लेकिन यह जादू नहीं है दोस्तों। यह है स्मार्ट इकोनॉमिक्स। अब पहले थोड़ा बैकग्राउंड में चलते हैं। पिछले 50 सालों से दुनिया का तेल व्यापार डॉलर में होता आया है। इसे कहते हैं पेट्रो डॉलर सिस्टम। अमेरिका ने सऊदी अरब, कुवैत जैसे देशों से डील की कि तुम तेल बेचो लेकिन पैसे डॉलर में लो।
इसे भी पढ़ें: Share Market में बहार, Dollar के मुकाबले Indian Rupee ने लगाई 21 पैसे की जोरदार छलांग।
अमेरिका को फायदा हुआ क्योंकि उसने बिना कुछ किए अपना पैसा सर्कुलेट कराया दुनिया में। उनकी ट्रेजडी बिल्स में इन्वेस्टमेंट आता रहा। लेकिन अब समय बदल रहा है। भारत जैसे देश कह रहे हैं कि क्यों भाई हमारा रुपया क्या कम है और इसी बीच एक बड़ा खेल हुआ। साल 2025 में आरबीआई ने एक साइलेंट लेकिन रिवोल्यूशनरी सर्कुलर जारी कर दिया। 12 अगस्त 2025 को आरबीआई ने स्पेशल रूपी वस्त्रो अकाउंट वाले फॉरेन होल्डर्स को इंडियन गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और ट्रेजरी बिल्स में इन्वेस्टमेंट करने की परमिशन दे डाली। मतलब रूस जैसे देश जो हमें तेल बेचते हैं वो रुपए में पेमेंट लेते हैं और फिर वो रुपए इंडिया में ही इन्वेस्ट कर देते हैं। कोई डॉलर बाहर जाता ही नहीं।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.