भारत और ब्राजील के बीच शनिवार (21 फरवरी) को ट्रेड डील साइन हुई. इसमें टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसी कई चीजें शामिल हैं. ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा 4 दिवसीय यात्रा पर भारत आए, जिनके साथ पूरा एक डेलिगेशन भी था. दोनों देशों की इस डील पर अब प्रोफेसर और जाने-माने स्ट्रेटेजिक थिंकर ब्रह्मा चेलानी का बयान आया है.
ब्रह्मा चेलानी ने शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि चीन के एकाधिकार को अब चुनौती मिलेगी क्योंकि भारत और ब्राजील ने एक नया खनिज समझौता किया है. उन्होंने बताया कि साउथ अमेरिका में सबसे बड़े देश ब्राज़ील के पास दुर्लभ खनिजों का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा भंडार है लगभग 21 मिलियन टन. दुर्लभ खनिजों के मामले में ब्राजील, चीन के बाद दूसरे स्थान पर है.
‘ब्राज़ील के विशाल संसाधन का भारत को मिलेगा फायदा’
उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति लूला ने नई दिल्ली में महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर जिस द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, उसका उद्देश्य ब्राज़ील के विशाल संसाधन आधार को भारत की बढ़ती औद्योगिक मांग और तकनीकी क्षमताओं के साथ जोड़कर एक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है.
‘खनन क्षेत्र में महाशक्ति है ब्राजील’
ब्रह्मा चेलानी ने बताया कि पिछले साल अप्रैल में बीजिंग द्वारा भारत को दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर अचानक प्रतिबंध लगाने के फैसले ने नई दिल्ली को अपने स्रोत विविध करने के लिए प्रेरित किया है. हालांकि ब्राज़ील लंबे समय से खनन क्षेत्र में एक महाशक्ति रहा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर यथास्थिति को चुनौती देने के गंभीर प्रयास में उसने हाल ही में दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग कैपेसिटी (प्रसंस्करण क्षमता) को बढ़ाना शुरू किया है.
उन्होंने बताया कि भारत-ब्राजील की साझेदारी से दोनों देश मिलकर एक ऐसी (वैल्यू चेन) मूल्य श्रृंखला का निर्माण करना चाहते हैं, जो चीनी प्रसंस्करण सुविधाओं को दरकिनार कर दे और इस समझौते में (डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी) अनुगामी प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों पर सहयोग भी शामिल है.
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