सोमवार को प्रधानमंत्री ने भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी प्रेमियों के बीच रहकर एआई, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता की झलक मिलती है. हम मिलकर ऐसे समाधान तैयार करेंगे जो न केवल भारत बल्कि दुनिया के लिए उपयोगी होंगे.
600 से अधिक उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स भाग ले रहे
एक्सपो में 600 से अधिक उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स भाग ले रहे हैं, जिनमें कई वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक और आम लोगों के लिए समाधान पेश कर रहे हैं. यह 70,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है, जहां वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियां, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक संस्थान, शोध संगठन, केंद्र-राज्य सरकारें और अंतरराष्ट्रीय साझेदार एक मंच पर हैं. 13 देशों के मंडप लगे हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीका शामिल हैं. एक्सपो ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ थीम पर आधारित है, जिसमें 300 से अधिक क्यूरेटेड प्रदर्शनी पवेलियन और लाइव डेमो हैं.
दूसरे दिन की चर्चाओं का फोकस एआई के कारण नौकरियों में व्यवधान, सार्वजनिक स्वास्थ्य, एल्गोरिदम की जिम्मेदारी, बच्चों की सुरक्षा और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग पर है. प्रमुख वक्ताओं में संयुक्त राष्ट्र के अमनदीप सिंह गिल और नीति आयोग के अमिताभ कांत शामिल हैं. पैनल में ऑटोमेशन के रोजगार पर प्रभाव, स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई टूल्स का उपयोग और जिम्मेदार एआई डिजाइन के लिए सुरक्षा उपायों पर बात हो रही है.
दिन 2 में एआई हेल्थ, एनर्जी, एजुकेशन, एग्रीकल्चर, जेंडर एम्पावरमेंट और डिसेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में केसबुक्स लॉन्च किए गए. साथ ही ‘एआई बाय हर: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज’ महिलाओं के नेतृत्व वाली एआई इनोवेशन पर फोकस कर रहा है. समिट में 30+ देशों के 300+ प्रदर्शक और 10+ थीमेटिक पवेलियन हैं, जो एआई के समावेशी विकास, सस्टेनेबल फ्यूचर और मानवता के लिए उपयोग पर जोर दे रहे हैं. यह आयोजन भारत को एआई गवर्नेंस में ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहां विकासशील देशों की आवाज को मजबूती मिल रही है.
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