सेंट्रल एशियाई देशों में मुस्लिम मेजॉरिटी में हैं। सेंट्रल एशिया में आने वाले तुर्कमेनिस्तान में 93% मुस्लिम है। उज्बेकिस्तान में 88% ताजाकिस्तान में 85% मुस्लिम है। तो किरगिस्तान में 75% मुस्लिम है और कजाकिस्तान में 70% यह सभी देश कभी सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करते थे। लेकिन सोवियत संघ के टूटने के बाद यह सभी आजाद देश बन गए। हालांकि इसके बावजूद इन देशों के रिश्ते रूस से अच्छे रहे मगर हाल फिलहाल में जिस तरह से सेंट्रल एशियाई देश अमेरिका की तरफ झुके हैं और जिस तरह से इसी इलाके के लोग रूस में हुए आतंकी हमले में पाए गए हैं उसने रूस को काफी चौकन्ना कर दिया है। इसी कड़ी में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि रूस ने अब शायद मन बना लिया है कि वह सेंट्रल एशियाई देशों की जगह भारतीय लोगों को प्राथमिकता देगा।
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भारतीय लोगों को नौकरी देगा। वैसे आपको बता दें कि रूस का इस पर कोई बयान नहीं आया है। रूस ने ऐसा कोई कानून पास नहीं किया है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसे काम ऐसे ही किए जाते हैं। यह ठीक उसी तरह का फैसला है जैसा इजराइल डंके की चोट पर ले चुका है। हमास के आतंकी हमले के बाद इजराइल ने भी फिलिस्तीनियों को नौकरी देने की जगह भारतीयों को चुना। इजराइल को भारतीय वर्कर्स पर भरोसा है। इजराइलियों का मानना है कि फिलिस्तीनियों की तरह भारतीय लोग देश को खोखला नहीं करेंगे। इसीलिए पिछले 2 सालों से इजराइल जमकर भारतीय वर्कर्स को नौकरी दे रहा है।
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बहरहाल जैसा झटका इजराइल को लगा था वैसा ही झटका रूस को 2024 में लगा। जब राजधानी मॉस्को में हुए एक बड़े आतंकी हमले के बाद यह जानकारी सामने आई कि हमलावर सेंट्रल एशियाई देश ताजाकिस्तान का था। इस हमले में 137 से ज्यादा रूसी लोग मारे गए थे। लेकिन मामला रूस के लिए तब गंभीर हुआ जब इस आतंकी हमले के कुछ महीनों बाद पहली बार सेंट्रल एशियाई देशों ने डॉनल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस मुलाकात को सी5 प्लस वन कहा गया। यानी सेंट्रल एशिया के पांच देश और अमेरिका। इस बड़ी मीटिंग के तुरंत बाद उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने डॉनल्ड ट्रंप को प्रेसिडेंट ऑफ द वर्ल्ड कह दिया जिससे रूस भड़क गया।
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ऐसे में दावे के मुताबिक अब रूसी लोगों को सेंट्रल एशिया पर कम भरोसा है। वह भारतीय लोगों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। जिस तरह से सेंट्रल एशिया के लोग रूस में कट्टरता फैलाते पकड़े गए, आतंकी हमले करते पकड़े गए, उसने रूस को हिला कर रख दिया। वैसे भी पिछले 3 सालों से भारत और रूस की नजदीकी काफी बढ़ी है। इसीलिए रूस भी इजराइल की तरह भारतीय लोगों पर भरोसा जता रहा है। रूस ऐलान कर चुका है कि जंग की वजह से आए लेबर संकट को कम करने के लिए उसे बड़ी संख्या में भारतीय वर्कर्स की जरूरत है।
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