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हार्दिक पंड्या को आज भी दुनिया के बेहतरीन ऑलराउंडर्स में गिना जाता है और बुमराह के साथ उन्हें टीम का सबसे अहम खिलाड़ी माना जाता है लेकिन इस टूर्नामेंट में शिवम दुबे ने बल्ले से पांड्या को भी पीछे छोड़ दिया. भले ही गेंदबाजी में उनके पास पांड्या जैसी धार नहीं है, लेकिन उनकी बल्लेबाजी ने कई मौकों पर मैच का रुख बदल दिया.
वर्ल्ड कप में शिवम दुबे ने हार्दिक पंड्या को पीछे छोड़ दिया
हार्दिक पंड्या को आज भी दुनिया के बेहतरीन ऑलराउंडर्स में गिना जाता है और बुमराह के साथ उन्हें टीम का सबसे अहम खिलाड़ी माना जाता है लेकिन इस टूर्नामेंट में शिवम दुबे ने बल्ले से पांड्या को भी पीछे छोड़ दिया. भले ही गेंदबाजी में उनके पास पांड्या जैसी धार नहीं है, लेकिन उनकी बल्लेबाजी ने कई मौकों पर मैच का रुख बदल दिया.
बल्लेबाजी में हार्दिक से बेहतर रहे दुबे
शिवम दुबे की अहमियत समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि वे किन परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने आए. शायद ही कभी उन्हें तैयार मंच मिला हो. अक्सर वे तब क्रीज पर आए जब टीम को संभालने या तेजी से रन बनाने की जरूरत थी और यही उनके प्रदर्शन को खास बनाता है.यूएसए के खिलाफ शून्य पर आउट होना उनके लिए बड़ा झटका हो सकता था, लेकिन वही उनका टूर्नामेंट में एकमात्र असफल प्रदर्शन रहा. नामीबिया के खिलाफ 16 गेंदों में 23 रन बनाकर उन्होंने भारत का स्कोर 200 के पार पहुंचाया. कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ मुश्किल पिच पर उनकी 17 गेंदों में 27 रन की पारी ने टीम को मजबूती दी. नीदरलैंड्स के खिलाफ उनकी 31 गेंदों में 66 रन की पारी शायद उनके खेल का सबसे बेहतरीन उदाहरण थी। 69/3 की स्थिति में आकर उन्होंने चार चौके, छह छक्के और दो विकेट लेकर शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया.
बड़े मैचों में निर्णायक भूमिका
सुपर 8 और नॉकआउट चरण में, जहां अक्सर खिलाड़ी दबाव में टूट जाते हैं, दुबे और भी मजबूत होकर उभरे. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 42 रन की पारी ने बड़ी हार को टाल दिया। वेस्टइंडीज के खिलाफ क्वार्टर फाइनल जैसे मुकाबले में 19वें ओवर में लगाए गए दो चौकों ने मैच का रुख बदल दिया, जिसकी तारीफ खुद बुमराह ने की. इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में उनकी 25 गेंदों में 43 रन की पारी सात रन की जीत में निर्णायक साबित हुई। उन्होंने आदिल रशीद जैसे खतरनाक स्पिनर को भी नहीं छोड़ा. फाइनल में जब टीम लड़खड़ा रही थी, तब उन्होंने सिर्फ 8 गेंदों में 26 रन बनाकर स्कोर 255 तक पहुंचाया, जो टी20 वर्ल्ड कप फाइनल का सबसे बड़ा स्कोर बना. दुबे के 235 रन लगभग 170 के स्ट्राइक रेट से भले ही शानदार आंकड़े हैं, लेकिन उनकी असली अहमियत इससे कहीं ज्यादा है. उन्होंने टीम को रणनीतिक लचीलापन दिया. उनकी मौजूदगी से टीम अतिरिक्त बल्लेबाज खिला सकी, बिना गेंदबाजी कमजोर किए.
मोस्ट वैल्यूएवल खिलाड़ी
गेंदबाजी में उन्होंने कोच मॉर्नी मॉर्कल के साथ मेहनत कर वाइड यॉर्कर और धीमी गेंदों का प्रभावी इस्तेमाल किया. यही नहीं, उन्होंने डेवाल्ड ब्रेविस और डेविड मिलर के बीच 97 रन की साझेदारी भी तोड़ी. बल्लेबाजी में भी उनका खेल बदला हुआ नजर आया. पहले वे एकतरफा बल्लेबाज लगते थे, लेकिन इस बार उन्होंने मैदान के अलग-अलग हिस्सों में शॉट खेलने की क्षमता दिखाई. उनकी लंबाई का फायदा उन्हें मिला और वे गुड लेंथ गेंदों पर भी आसानी से शॉट लगा पाए. यही वजह है कि उन्हें भारत का असली MVP कहना अतिशयोक्ति नहीं है. यह उनके उस योगदान का सम्मान है, जिसे आंकड़ों से पूरी तरह मापा नहीं जा सकता और जो फिलहाल टीम के लिए लगभग अपूरणीय है.
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