Iran War Negatively Impacts the Rupee: रुपए ने सोमवार को कारोबार के दौरान शुरुआती बढ़त गंवा दी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर 95.22 पर आ गया. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, जारी भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर के माहौल के कारण घरेलू मुद्रा दबाव में है.
रुपए ने हालांकि बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन बाद में इसने शुरुआती लाभ गंवा दिया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.62 प्रति डॉलर पर खुला और फिर 93.57 प्रति डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले बंद स्तर से 128 पैसे की बढ़त दर्शाता है.
ईरान युद्ध की वजह से हिल गया वैश्विक बाजार
यह बढ़त हालांकि बरकरार नहीं रह सकी और रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले दिन के कारोबार में 95.22 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर गया. ईरान में जारी युद्ध और मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिल रहा है. इससे पहले शुक्रवार को रुपया 89 पैसे की भारी गिरावट के साथ 94.85 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था.
आम आदमी पर क्या होगा असर?
रुपए के कमजोर होने का मतलब है कि अब विदेश से आने वाली हर चीज महंगी हो जाएगी. यानी अब कच्चे तेल के लिए भारत को अब ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे, जिससे आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.
रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में आएगा उछाल!
इतना ही नहीं मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स, जिनके पार्ट्स विदेश से आते हैं, उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं. इसके साथ ही जो छात्र विदेश में पढ़ रहे हैं या जो लोग विदेश घूमने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे. माल ढुलाई भी महंगी होगी, जिससे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी उछाल आ सकता है.
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