अमेरिका और ईरान के बीच संभवित शांति वार्ता और उसका मंच पाकिस्तान। लेकिन बातचीत से पहले ही सुरक्षा को लेकर बड़ी चेतावनी सामने आ गई है। व्हाइट हाउस के पूर्व प्रेस सचिव एरी फ्लेशर ने साफ कहा है कि पाकिस्तान में अमेरिकी प्रतिनिधियों खास करके जेडी विंस की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा है। क्या यह वार्ता शांति का रास्ता खोलेगी या नए तनाव को जन्म देगी? यूनाइटेड स्टेट और ईरान के बीच शनिवार को पाकिस्तान में शांति वार्ता प्रस्तावित होने वाली है। इससे पहले दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के सशर्त युद्ध विराम पर सहमति बनी थी जिसे स्थाई शांति में बदलने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इस पहल से पहले ही एरी फ्लेशर ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। उन्होंने पाकिस्तान को हथियारों से लेस और जोखिम भरा बताते हुए कहा है कि यहां हाई प्रोफाइल विजिट्स हमेशा खतरे में ही घिरी रहती है।
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उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे विल क्लिंटन को अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान डिकॉय एयरक्राफ्ट का सहारा लेना पड़ा और 2006 में जॉर्ज डब्ल्यू वुश की यात्रा को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीर आपत्ति जताई थी। यानी इस बार की वार्ता सिर्फ कूटनीति नहीं बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी बड़ी परीक्षा बन सकती है। इसी बीच तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजिस्कियन ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा है कि लेबनान पर इजराइल के हमले इस शुरुआती युद्ध विराम का उल्लंघन है और साफ चेतावनी दी है कि अगर यह हमले नहीं रुके तो पाकिस्तान में होने वाली वार्ता का कोई मतलब नहीं रहेगा। वहीं पाकिस्तान ने इस मीटिंग को सफल बनाने के लिए राजधानी को हाई अलर्ट मोड पर डाल दिया है। पूरे शहर को एक तरफ से छावनी में तब्दील कर दी गई है।
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