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उन्होंने कहा, “हम क्षेत्र के महत्वपूर्ण देशों के साथ नए गठबंधन बना रहे हैं,” हालांकि उन्होंने उन देशों के नाम नहीं बताए। “जल्द ही, मैं आपको इन महत्वपूर्ण समझौतों के बारे में और बता पाऊंगा।” नेतन्याहू की टिप्पणियां इज़रायल और अरब जगत के कुछ हिस्सों के बीच बढ़ते तालमेल की ओर इशारा करती हैं। इस तालमेल की मुख्य वजह ईरान की सैन्य और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर दोनों पक्षों की साझा चिंताएं हैं।
उन्होंने इस पहल को एक व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया, जो उनके अनुसार युद्ध के मैदान में मिली बड़ी सफलताओं के बाद शुरू की गई है। नेतन्याहू ने कहा, “हमने करारा प्रहार किया और दो ऐसे खतरों को दूर कर दिया जो हमारे अस्तित्व के लिए खतरा थे।” यहां उनका इशारा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं की ओर था।
इज़रायली नेता ने दावा किया कि हाल के अभियानों ने हथियार बनाने की ईरान की क्षमता को काफी हद तक कमज़ोर कर दिया है। उन्होंने पहले किए गए हमलों का ज़िक्र करते हुए कहा, “हमने अपने ऊपर से ईरान के परमाणु हथियार और कई बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस होने के तत्काल खतरे को हटा दिया है।”
उन्होंने आगे कहा कि चल रहे अभियानों ने ऐसे हथियार बनाने की ईरान की औद्योगिक क्षमता को और भी कमज़ोर कर दिया है। नेतन्याहू ने कहा, “हमने एक और उपलब्धि हासिल की है, जिसके तहत हमने इस शासन की, विनाश के इन साधनों को बनाने की औद्योगिक क्षमता को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है।”
नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव को सीमित कर दिया गया है, और दावा किया कि हिज़्बुल्लाह अब इज़रायल के लिए “कोई रणनीतिक खतरा” नहीं रह गया है।
उन्होंने इससे भी आगे बढ़कर तेहरान में लंबे समय के बदलाव की भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा, “आज नहीं तो कल, ईरानी शासन का पतन निश्चित है।”
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