Hepatitis B vs Hepatitis C: हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी लिवर के गंभीर इंफेक्शन हैं. ये बीमारियां संक्रमित खून और असुरक्षित यौन संपर्क से फैलती हैं. ये संक्रमण लिवर सिरोसिस और कैंसर का कारण बन सकते हैं. समय पर इलाज न मिलने से लोगों की मौत हो सकती है. इन बीमारियों को दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है और इनकी वैक्सीन भी उपलब्ध है.
हेपेटाइटिस बी और सी लिवर से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं.
नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के सीनियर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया कि हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी लिवर से जुड़े वायरल इंफेक्शन हैं. ये दोनों इंफेक्शन मुख्य रूप से वायरस के कारण होते हैं और सीधे लिवर पर हमला करते हैं. अगर समय पर इन परेशानियों की पहचान और इलाज न हो, तो ये बीमारियां धीरे-धीरे लिवर को डैमेज कर सकती हैं और मौत का कारण बन सकती हैं. ये इंफेक्शन लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण भी बन सकते हैं. हेपेटाइटिस बी संक्रमित खून, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई और मां से बच्चे में जन्म के समय फैल सकता है. कई मामलों में शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं. लोगों को थकान, भूख न लगना, उल्टी, बुखार, पेट दर्द और पीलिया जैसे संकेत नजर आते हैं. कुछ लोगों में यह संक्रमण अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कई मामलों में यह खतरनाक हो जाता है. समय पर इलाज न मिलने से यह इंफेक्शन जानलेवा हो सकता है.
एक्सपर्ट के मुताबिक हेपेटाइटिस C भी एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस (HCV) से होता है. यह भी संक्रमित खून के संपर्क, संक्रमित सुई या मेडिकल उपकरणों का दोबारा उपयोग करने से फैलता है. हेपेटाइटिस C के शुरुआती लक्षण अधिकतर मरीजों में दिखाई नहीं देते. यही कारण है कि कई लोगों को सालों तक पता ही नहीं चलता कि वे इससे संक्रमित हैं. समय के साथ यह संक्रमण लिवर को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है और सिरोसिस या लिवर फेलियर की स्थिति पैदा कर सकता है. इससे लोगों की जान चली जाती है. हेपेटाइटिस बी और सी दोनों ही संक्रमण लंबे समय में जानलेवा साबित हो सकते हैं. क्रॉनिक संक्रमण के कारण लिवर में सूजन बनी रहती है, जिससे धीरे-धीरे लिवर की सेल्स नष्ट होने लगती हैं. इससे लिवर सिरोसिस और बाद में लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
डॉक्टर ने बताया कि हेपेटाइटिस बी के लिए असरदार दवाइयां उपलब्ध हैं, जो वायरस को कंट्रोल रखने में मदद करती हैं. हालांकि इसे पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है. इसके लिए वैक्सीन भी उपलब्ध है, जो संक्रमण से बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका है. वहीं हेपेटाइटिस C एंटीवायरल दवाओं से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. हेपेटाइटिस बी और सी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. अगर किसी व्यक्ति को बार-बार थकान, पीलिया, पेट में सूजन या लिवर से जुड़ी अन्य समस्याएं हों, तो तुरंत लिवर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. इन संक्रमण का सही समय पर पता लगाने के लिए लोगों को साल में एक बार अपने लिवर की जांच जरूर करानी चाहिए. वक्त रहते इलाज होगा, तो लिवर को नुकसान कम होगा.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
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