पिथौरागढ़: हरे पत्तों वाली अजवाइन एक खुशबूदार औषधीय पौधा है, जो पाचन सुधारने, गैस और अपच दूर करने में मदद करता है. इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए सर्दी-जुकाम और खांसी में इसका काढ़ा लाभकारी माना जाता है. इसके पत्तों का लेप त्वचा की खुजली में भी राहत देता है और नियमित सेवन से इम्युनिटी मजबूत होती है.
हम सब घरों में जो सूखी अजवाइन इस्तेमाल करते हैं, वह दरअसल इसी पौधे के बीज होते हैं. लेकिन पहाड़ी और कुछ ग्रामीण इलाकों में इसका हरा पौधा भी खूब इस्तेमाल किया जाता है, जिसे आम बोलचाल में हरे पत्तों वाली अजवाइन कहा जाता है. इसके पत्ते खुशबूदार होते हैं और हल्का तीखा-सा स्वाद देते हैं. कई जगह इसे सब्जी, चटनी या काढ़े के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

हरे पत्तों वाली अजवाइन का पौधा छोटा और झाड़ीदार होता है. इसके पत्ते मोटे, हल्के रोएंदार और खुशबू से भरे होते हैं. जब आप इसे हाथ से मसलते हैं, तो इसकी तेज सुगंध तुरंत महसूस होती है. यही सुगंध इसके औषधीय गुणों का संकेत भी मानी जाती है.

हरे पत्तों वाली अजवाइन की तासीर गर्म मानी जाती है. यही वजह है कि सर्दी-जुकाम या गले में खराश होने पर इसका काढ़ा पीना फायदेमंद माना जाता है. इसके पत्तों को पानी में उबालकर उसमें थोड़ा अदरक और शहद मिलाकर पीने से गले को राहत मिलती है और शरीर को अंदर से गर्माहट मिलती है. इस पौधे में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो बलगम को कम करने में मदद करते हैं. अगर किसी को पुरानी खांसी या सांस लेने में हल्की परेशानी हो, तो इसके पत्तों का काढ़ा या भाप लेना लाभदायक माना जाता है. कई लोग इसके पत्तों को उबालकर उसकी भाप लेते हैं, जिससे नाक और सीने की जकड़न कम हो जाती है.
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इस पौधे में मौजूद पोषक तत्व शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं. नियमित रूप से इसके पत्तों का सेवन करने से शरीर छोटी-मोटी बीमारियों से जल्दी नहीं घिरता. खासकर बदलते मौसम में इसका काढ़ा पीना फायदेमंद माना जाता है.<br />हरे पत्तों वाली अजवाइन का सेवन शरीर की चर्बी को कम करने में भी मदद कर सकता है. यह पाचन को बेहतर बनाकर मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है.

पत्तों की चटनी बनाकर खा सकते हैं.<br />सब्जी या दाल में बारीक काटकर डाल सकते हैं.<br />काढ़ा बनाकर पी सकते हैं.<br />पत्तों को नमक के साथ चबा सकते हैं.

* ज्यादा मात्रा में इसका सेवन न करें, वरना पेट में जलन हो सकती है.<br />* गर्भवती महिलाओं को इसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए.<br />* किसी गंभीर बीमारी में इसे केवल घरेलू उपाय समझकर ही लें, इलाज का विकल्प नहीं.
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