हमारी गलत आदतें ही कब्ज की सबसे बड़ी वजह बनती हैं. कम पानी पीना, फाइबर की कमी, देर रात तक जागना और खाना, सुबह देर से उठना, पूप को जबरदस्ती रोकना और टॉयलेट में मोबाइल लेकर लंबे समय तक बैठे रहना – ये सभी कारण आंतों की नैचुरल प्रक्रिया को बिगाड़ देते हैं. इसके अलावा मानसिक तनाव भी पाचन तंत्र के काम को स्लो कर देता है. जब आंतों की मूवमेंट कम हो जाती है तो स्टूल सख्त हो जाता है और बाहर निकलने में दिक्कत होती है. धीरे-धीरे यही समस्या पुरानी कब्ज का रूप ले लेती है.
1. सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना
सुबह उठते ही खाली पेट कम से कम दो गिलास गुनगुना पानी पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह हमारे पाचन तंत्र को धीरे-धीरे सक्रिय करता है और आंतों की मूवमेंट को बढ़ाता है. गुनगुना पानी कोलन रिफ्लेक्स को एक्टिव करता है, जिससे स्टूल पास करना आसान हो जाता है. कई लोग पानी तो पीते हैं, लेकिन सही मात्रा और नियमितता नहीं रखते. अगर रोजाना एक ही समय पर पानी पिया जाए तो शरीर की अंदरूनी घड़ी सेट हो जाती है और पेट साफ होने की आदत बन जाती है.
2. इसबगोल यानी सिलियम हस्क का सही इस्तेमाल
इसबगोल में घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो स्टूल को भारी और नरम बनाता है. रात को सोने से पहले एक से दो चम्मच इसबगोल गुनगुने पानी या दूध के साथ लेने से सुबह पेट साफ होने में मदद मिलती है. यह आंतों की सफाई में सहायक होता है और लंबे समय से चल रही कब्ज में भी राहत देता है. हालांकि इसे नियमित मात्रा में ही लेना चाहिए और ज्यादा मात्रा से बचना चाहिए. यह कोलन की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है.
3. फाइबर से भरपूर भोजन शामिल करें
कब्ज से बचने के लिए रोजाना के खाने में फाइबर शामिल करना बहुत जरूरी है. हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद, पपीता, सेब, नाशपाती, दालें और साबुत अनाज आंतों को मजबूत बनाते हैं. फाइबर स्टूल में पानी को बनाए रखता है, जिससे वह सख्त नहीं होता और आसानी से बाहर निकल जाता है. अगर डाइट में जंक फूड ज्यादा और प्राकृतिक आहार कम है तो कब्ज की समस्या बार-बार हो सकती है. इसलिए संतुलित और फाइबर युक्त आहार अपनाना जरूरी है.
4. नियमित व्यायाम और सुबह की सैर
शारीरिक गतिविधि कम होने से भी कब्ज बढ़ती है. रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तेज चाल से चलना, योग या हल्की एक्सरसाइज करना पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है. खासतौर पर सुबह की सैर आंतों की मूवमेंट को बेहतर बनाती है. जो लोग पूरा दिन बैठकर काम करते हैं, उन्हें बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना चाहिए. इससे पाचन तंत्र सुस्त नहीं पड़ता.
5. तनाव कम करें और सही दिनचर्या अपनाएं
मानसिक तनाव सीधे तौर पर पाचन तंत्र को प्रभावित करता है. ज्यादा चिंता या तनाव होने पर आंतों की गति धीमी हो जाती है. समय पर सोना, सुबह जल्दी उठना और मल त्याग के लिए नियमित समय तय करना बहुत जरूरी है. टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल करने से बचें और ज्यादा देर तक न बैठें. जब दिनचर्या संतुलित होती है तो पेट भी लंबे समय तक स्वस्थ रहता है.
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