Health News: विंध्य क्षेत्र में बरसात के मौसम में कई औषधीय पौधे प्राकृतिक रूप से उग आते हैं. इनमें चकोर, जिसे स्थानीय भाषा में चकौड़ा और संस्कृत में चक्रमर्द कहा जाता है, का विशेष महत्व है. सदियों से आयुर्वेद में इसका प्रयोग होता रहा है और यह आज भी कई रोगों में असरदार साबित हो रहा है. आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह के अनुसार, चकोर का पौधा शुगर, खांसी, गले के संक्रमण और त्वचा रोगों में बहुत लाभकारी है. इसकी पत्तियों का काढ़ा बलगम वाली खांसी में राहत देता है. लगातार जुकाम या खांसी की समस्या होने पर पत्तियों का रस सेवन लाभकारी होता है. गले में सूजन या संक्रमण के समय भी इसका उपयोग किया जा सकता है. त्वचा रोगों में चकोर के बीजों और पत्तियों का प्रयोग प्रभावी माना गया है. दाद, खुजली या रैशेज की स्थिति में बीजों को पीसकर दही के साथ प्रभावित हिस्से पर लेप लगाने से आराम मिलता है. मधुमेह यानी शुगर के रोगियों के लिए भी पत्तियों और बीजों के रस का सेवन लाभकारी है.
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.